इंसाफ कुरैशी
- नगर आगमन पर भव्य हुआ हज कमेटी के चेयरमैन का स्वागत।
श्योपुर, मध्य प्रदेश।
शिक्षा वो पूंजी हैं, जो आपको मान-सम्मान सत्कार दिला सकती हैं, जिसके पास शिक्षा है वह इस धरती पर सबसे सम्मानित प्राणी हैं। जिसके पास शिक्षा नहीं वही सबसे दरिद्र है। भले ही आप भूखे सो जाओ आधी रोटी कम खाओ पर बच्चों को जरूर पढ़ाओ। यह बात मप्र हज कमेटी के चेयरमैन (मंत्री दर्जा प्राप्त) रफत वारसी ने जमातखाना पर आयोजित मुस्लिम प्रतिभा सम्मान समारोह में उद्बोधन देते हुए कहीं। इस दौरान उन्होंने शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक समृद्धि की ओर उठते वक्फ के कदम किताब का भी विमोचन किया।
हज कमेटी के चेयरमैन बनने के बाद पहली बार श्योपुर पहुंचे रफत वारसी का नगर आगमन पर भव्य स्वागत हुआ। इस दौरान उन्होंने वक्फ इंतजामिया कमेटी जमातखाना द्वारा आयोजित मुस्लिम प्रतिभा सम्मान समारोह में शिरकत कर सामाजिक, राजनैतिक, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुपोषण इत्यादि के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले स्वयंसेवियों का सम्मान किया। कार्यक्रम में 12वीं परीक्षा 75 फीसद या उससे अधिक अंकों से पास करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार भी दिए गए। रफत वारसी ने मुस्लिम समाज ने आव्हान किया कि, वह तालीम के क्षेत्र में काम करें। जो कौम तालीम के क्षेत्र में आगे बढ़ती हैं, वह हर मामले में आगे रहती है। मुसलमानों की दरिद्रता का कारण भी तालीम में पिछड़ना है। उन्होंने कहा कि सिर्फ नौकरी हांसिल करने की गरज से बच्चों का तालीम न दिलाए। तालीम नौकरी नहीं बल्कि सम्मान की गारंटी देती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्ष शहरकाजी अतीक उल्लाह कुरैशी ने की। रिटायर जज अनवार अहमद, अंजुमन सदर शब्बीर नागौरी, बार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष एड. शकील कुरैशी, कब्रिस्तान समिति के अध्यक्ष मिर्जा असलम बेग विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन मो. इल्यिस कुरैशी एवं मुस्तफा दाउदी ने किया। आभार प्रदर्शन सैयद हामिद अली नकवी ने जताया।
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वक्फ संरक्षण और इतिहास की जानकारी से रूबरू कराती किताब
कार्यक्रम में वक्फ संरक्षण पर पहली बार लिखी गई किताब का विमोचन भी किया गया। किताब में वक्फ जायदादों को खुर्द-बुर्द करने से रोकने के लिए जीपीएस सिस्टम कैसे काम करेगा। मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार की कौन-कौन सी योजनाएं संचालित हैं, जिनका लाभ कैसे लिया जा सकता हैं। मुस्लिम समाज के लिए जिन लोगों ने उल्लेखनीय योगदान दिया हैं, उनका जीवन परिचय भी किताब में कराया गया। वक्फ जायदादों को स्थापित करने में किन मुस्लिम शासकों का योगदान एवं मुसलमानों का सामाजिक ताना-बाना जो अंजुमन के माध्यम से पंच परमेश्वर पद्धति पर आधारित था, कैसे शुरू हुआ, इत्यादि की जानकारी दी गई हैं। किताब के लेखक इंसाफ अहमद नूर कुरैशी का कहना है कि, यह किताब सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार एवं वक्फ के संरक्षण के लिए पूरे प्रदेश में नवाचार हो सकती हैं।
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