ब्यूरो चीफ़ शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस का आयोजन शहर के विभिन्न स्थानों पर किया गया,इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए पत्रकारिता से जुड़े हुए पत्रकारों ने इस दिन की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला, साथ ही बताया कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारिता एक जोखिम भरा काम है,कई बार पत्रकारों पर किसी खबर को कवर करने के दौरान गंभीर रूप से चोटिल भी हो जाते हैं। कई बार पत्रकारों को सच्चाई सामने लाने पर जान भी गंवानी पड़ती है,इसके कई उदाहरण भी मौजूद हैं।दुनियाभर में इसके बहुत सारे उदाहरण मिल जाएंगे,सच को सामने लाने के लिए कई बार पत्रकार अपनी जान तक दांव पर लगा देते हैं, साथ ही जान भी गंवा देते हैं। अपनी जिम्मेदारी को अच्छे से निभाने वाले पत्रकारों की आवाज को कोई दबा नहीं सके,इस बात के लिए उन्हें स्वतंत्रता मिलना बहुत जरूरी है,तभी पत्रकार अच्छे तरीके से कर पाएंगे,इसे हर साल 3 मई को पूरे विश्व में प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है।
वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 मई को विश्व स्वतंत्र स्वतंत्र दिवस के रूप में मनाने का ऐलान किया,साथ ही वर्ष 1997 से प्रत्येक वर्ष 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है,साथ ही इस पर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता है,इसके माध्यम से आम जनता को प्रेस की स्वतंत्रता की जानकारी दी जाती है,आम लोगों के विभिन्न समस्याओं से संबंधित आवाज को बुलंद करने का एक माध्यम बनता है,इसके अलावा सरकार की उपलब्धता इसके संबंध में होने वाली गलत नीतियों और गलत तरीके अपनाकर समाज के लोगों को प्रताड़ित किया जाता है,और सरकारी योजनाओं में घपला करके इसको कई तरीकों से खानापूर्ति करके सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया जाता है,इन्हीं सब बिंदु पर जागृत करने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता की आजादी मिलना बहुत जरूरी है,ताकि पत्रकार/जर्नलिस्ट इन बिंदुओं को आम लोगों के सामने अपनी लेखनी के माध्यम से सामने लाकर वस्तु स्थिति की जानकारी दे सके।
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