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दीन-ए-इस्लाम के दामन से मिलेगी रोशनी - मौलाना शकील

Karunakar TripathiNov 23, 20220 views

-अस्करगंज में जलसा-ए-ग़ौसुलवरा। 

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

ग्यारहवीं शरीफ के बाद शहर में जलसों का दौर जारी है। शहर के विभिन्न मोहल्लों में जलसे हो रहे हैं। यह सिलसिला पूरे माह तक बदस्तूर जारी रहेगा। इसी क्रम में नौजवानाने अहले सुन्नत की ओर से सब्ज इमामबाड़ा अस्करगंज के पास जलसा-ए-ग़ौसुलवरा का आयोजन किया गया।
मुख्य अतिथि बस्ती के मौलाना शकील अहमद ने कहा कि क़ुरआन में अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है रसूल जो दें वह ले लो और जिससे मना करें उससे रुक जाओ। अल्लाह का यह फरमान हर दौर के लिए है। रसूल-ए-पाक हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, सहाबा किराम, अहले बैत व औलिया किराम हमारे रहनुमा व आदर्श हैं। हमें उन्हीं के नक्शेक़दम पर चलकर दीन व दुनिया की कामयाबी मिल सकती है। रसूल-ए-पाक की तालीमात पर अमल कर दुनिया वालों के लिए बेहतरीन नमूना बनें। इससे रसूल-ए-पाक खुश होंगे। मुसलमानों के ज्ञान व विद्या में किए गये कारनामों को नई नस्ल के सामने पेश किया जाए और उन्हें यह एहसास कराया जाए कि दीन-ए-इस्लाम के दामन से ही रोशनी मिलेगी। रसूल-ए-पाक के पैग़ाम को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है।
अध्यक्षता करते हुए नायब काजी मुफ्ती मोहम्मद अज़हर शम्सी ने कहा कि अल्लाह इल्मे दीन हासिल करने वालों से बेहद खुश होता है, इसलिए हम सबको चाहिए की इल्मे दीन खुद भी हासिल करें और घर वालों को भी सिखाएं। आज अगर अहले इस्लाम, इस्लाम के उसूल व क़ानून की पाबंदी करके सही मायने में मुसलमान बन जाएं तो दुनिया में जो लोग अभी दीन-ए-इस्लाम की लज़्ज़त से नावाकिफ हैं वह सब दीन-ए-इस्लाम के दामन से जुड़ जायेंगे। नेक बनें एक बनें। तालीम हासिल करें। शरीअत की पाबंदी करें।
मियां बाजार रेती रोड के निकट महफिल-ए-ग़ौसुलवरा हुई। मुफ़्ती-ए-शहर अख़्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि रसूल-ए-पाक हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम, सहाबा किराम व अहले बैत से मोहब्बत करना ईमान का हिस्सा है। बिना रसूल-ए-पाक की मोहब्बत के कोई इबादत मकबूल नहीं होती। 
अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्को मिल्लत के लिए दुआ की गई। उक्त कार्यक्रमों में कारी बदरे आलम निज़ामी, मौलाना अली अहमद, हाफिज मो. जुनैद, शादाब अहमद, मो. करीम, अतहर आलम, मुअज्जम, नूर मोहम्मद दानिश, अब्दुल कादिर, अली हसन, कारी शमसुद्दीन, मो. नाज़िम, मो. फैज अहमद, कारी सदरे आलम आदि ने शिरकत किया।



       

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