शहाबुद्वीन अहमद
बेतिया(पश्चिमी चंपारण)बिहार।
आज कलअपराधियों ने अपराध करने का नया नया तरीका ढूंढ लिया है,पुलिस उसी पुराने तरीकों पर मामले का अनुसंधान कर रही है। वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से ही अपराधियों तक पहुंचा जा सकता है,ऐसे में परिणाम स्वरूप देर से ही सही बिहार पुलिस ने अपने अधिकारियों को चक्कर ऐप का इस्तेमाल करने को कहा है। इस ऐप के इस्तेमाल से अपराधियों का डेटाबेस तो तैयार होगा ही साथ ही साथ अनुसंधानकर्ता की हर गतिविधियों की जानकारी वरीय पदाधिकारियों के पास रहेगी।इस बात की जानकारी संवाददाता को पुलिस महानिदेशकअभियान,के द्वारा दी गई,यह भी कहा गया कि सीनियर एसपी और एसपी को पत्र निकालकर निर्देश दिया गया है कि जल्द से जल्द इस ऐप से जुड़ने का निर्देश,डीएसपी, इंस्पेक्टर और थाना प्रभारी को दी जाए,इससेअपराधियों का डेटाबेस तैयार करने में सहूलियत मिलेगी,आगे उन्होंने बताया कि थानों मेंअपराधियों के खिलाफ दस्तावेजों ढूंढने पर भी नहीं मिलती है,इस ऐप के माध्यम से अपराधऔरअपराधियों के खिलाफ दस्तावेजआसानी से मिल पाएगी।उन्होंने आगे बताया कि सभी थानाअध्यक्ष अपने क्षेत्र अधीन काम करने वाले सभी पुलिस पदाधिकारियों का नाम, पद,मोबाइल नंबरअंकित करना पड़ेगा। इस ऐप के माध्यम से पासपोर्ट,किराएदार का वेरिफिकेशन,ठीकेदारों का चरित्र प्रमाण पत्र और हथियार का लाइसेंस लेने वालों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त हो सकेगी। पुलिस पदाधिकारियों को यह भी आदेश दिया गया है कि इस ऐप के माध्यम से अपराध नियंत्रण करने में आसानी होगी,साथ ही इस ऐप का अद्यतन प्रतिदिन करते रहना पड़ेगा,जो पुलिस पदाधिकारी ऐसा नहीं करेंगे उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
इस ऐप के माध्यम से अपराध होने के बाद संबंधित थानेदार या अनुसंधानकर्ता घटनास्थल पर गए हैं कि नहीं,इसकी सारी जानकारी पुलिस के उच्च अधिकारियों को आसानी से मिल पाएगी कि अनुसंधानकर्ता या थानाअध्यक्ष को घटनास्थल का फोटो भी इस ऐप पर अपलोड करना होगा,बिना घटनास्थल पर गए यदि किसी ने तस्वीरअपलोड कर दिया,तो वैसे पदाधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी। पुलिस पदाधिकारियों को घटनास्थल पर जाकर वहां की लोकेशन के साथ फोटो अपलोड करना पड़ेगा।
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