शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया(पश्चिमी चंपारण)बिहार।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी विश्व बाल श्रम दिवस पर विभिन्न तरह के कार्यक्रम,विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं संस्थानों पर आयोजित कर,इस पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में समाज के विभिन्न स्तरों के लोगों की उपस्थिति रही, इसअवसर पर वक्ताओं ने अपने अपने विचार इस बिंदु पर रखें। स्थानीय सामाजिक सह - मानवाधिकार कार्यकर्ता,सुरैया सहाब ने उपस्थित जनसमूह के सामने इस विषय पर बोलते हुए कहा कि बाल श्रम कराना नैतिक व मानवीय अधिकार नहीं,बच्चे न केवल राष्ट्र के भविष्य होते हैं,बल्कि वह हमारी गौरवशाली अतीत के सनवाहक भी होते हैं,इनके उज्जवल भविष्य स्वास्थ्य,पालन पोषण,शिक्षा में स्वस्थ वातावरण सभी बच्चों को नैसर्गिकअधिकार ही नहीं,हमारा सामाजिक को दायित्व भी है। बालश्रम इन उद्देश्यों से की पूर्ति में बाधक होने के साथ-साथ सभ्य समाज के लिए अभिशाप है। बाल श्रम एक जटिल सामाजिक आर्थिक समस्या है,राजय सरकार इस समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए कृत संकल्पित है। इसी क्रम में प्रत्येक वर्ष 12 जून को विश्व बाल श्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है।
बाल श्रम से विमुक्त व बच्चों के पुनर्वास हेतु राज्य कार्य योजना के द्वारा सतत प्रयास जारी है,इस पुनीत कार्य में समाज के सभी वर्गों की साझेदारी एवं परस्पर सहयोग अपेक्षित है। बाल श्रम मुक्त राज्य बनाने के लिए मात्र कानूनों का परिवर्तनआवश्यक नहीं है,बल्कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को प्रत्येक स्तर से इसे जड़ मूल से हटा देने के लिए संकल्पित भी होना पड़ेगा। बाल श्रम के विरुद्ध प्रचार प्रसार कर हमें जन चेतना का भी विकास करना होगा। बालश्रम दिवस के अवसर पर हम बिहार को बालसभा मुक्त राज्य बनाने के लिए पूरी निष्ठा प्रतिबद्धता के साथ संकल्प लें,और अपनी भूमिका का निर्वहन करें।
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