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उर्दू भाषा ने क्षेत्र, सीमा, वर्ण, जाति एवं धर्म से ऊपर उठ कर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा दिया - डॉ. सौरभ पांडेय

- सोशल मीडिया ने उर्दू को पूरी दुनिया में पहुंचाया - डॉ. अलाउद्दीन

- उर्दू की तरक्की के लिए गोरखपुर निभा रहा अहम भूमिका - वासिफ फारूकी

सेराज अहमद कुरैशी 

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

साजिद अली मेमोरियल कमेटी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय जश्न-ए-उर्दू कार्यक्रम के दूसरे दिन एमएसआई इंटर कॉलेज बक्शीपुर के सभागार में 'मोहम्मद हामिद अली एक खादिम-ए-उर्दू' विषय पर परिचर्चा हुई। इस दौरान शायर वासिफ फारूकी और शिब्ली नेशनल पीजी कॉलेज आजमगढ़ के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. अलाउद्दीन खान को सम्मानित किया गया। 

मुख्य अतिथि डॉ. अलाउद्दीन खान ने कहा कि उर्दू भाषा का भविष्य उज्जवल है। इस भाषा ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। इस दौर में उर्दू के विकास के लिए आनलाइन संसाधनों का प्रयोग किया जा रहा है। इससे उर्दू भाषा का भविष्य उज्जवल दिखाई देता है। आज के युग में टेक्नोलाजी और सांइस के प्रगति करने से उर्दू के लिए साइबर व डिजिटल दुनिया में रास्ते बहुत आसान हो गए हैं। मोहम्मद हामिद अली ने उर्दू के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

अध्यक्षता करते हुए वासिफ फारूकी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि इल्मो अदब की जमीं गोरखपुर से उर्दू की तरक्की के लिए काम किया जा रहा है। शहर के अतीत इसकी तहजीब की बात हो रही है तो इस समय मुझे एक बेहद दिलचस्प शख्सियत मोहम्मद हामिद अली की याद आ रही है। वह बस इस चाहत के साथ जीते रहे कि उर्दू पढ़ी जाए, उर्दू लिखी जाए, उर्दू बोली जाए। मेरे नजदीक उर्दू के खिदमतगारों में वो एक बुलंद दर्जे के मालिक थे।

गुरुद्वारा कबीर साहब मगहर की प्रशासक बीबी परमजीत कौर राना ने कहा कि उर्दू अदब की तरक्की के लिए गोरखपुर अहम भूमिका निभा रहा है। मोहम्मद हामिद अली ने उर्दू के विकास में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

डॉ. सौरभ पांडेय ने कहा कि उर्दू भाषा में जोड़ने की क्षमता मौजूद है। इस भाषा ने हमेशा परिवर्तन का स्वागत किया है और क्षेत्रीय सीमा, वर्ण, जाति एवं धर्म से ऊपर उठ कर राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने का काम किया है।

कमेटी के सचिव महबूब सईद हारिस ने कहा कि उर्दू का विकास तहजीब का विकास है और इसकी तालीम तरक्की के लिए जरूरी है। 

वरिष्ठ पत्रकार मुजफ्फरुल्लाह खान ने कहा कि मोहम्मद हामिद अली को उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार व प्रसार के संदर्भ मे उनकी व्यापक सेवा के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा। 

संचालन मो. फर्रूख जमाल ने किया। 

इस मौके पर काजी तवस्सुल हुसैन, डा. तारिक सईद, मो हाशिर अली, असीम वारसी, शमसुल इस्लाम, जफर अहमद खां, आसिफ सईद, मोहम्मद शरीक अली, डॉ.एहसान अहमद, तरन्नुम हसन, अनवर जिया, हसन जमाल बबुआ भाई, मोहम्मद रिजवान, मोहम्मद आज़म, शक्ति प्रकाश सिंह, प्रो. जावेद अली, जमीर अहमद पयाम, सेराज अहमद कुरैशी, मोहम्मद आजम समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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