रिपोर्ट: धनंजय कुमार शर्मा
बिल्थरा रोड (बलिया)
तहसील क्षेत्र के कृषि मंडी के निकट केक हब के गेस्ट हाउस में "दोस्ती की यादें ग्रुप" ने अपने मित्र जयप्रकाश उपाध्याय का 62 वां जन्म दिवस बड़े उल्लास के साथ मनाया।
कहा गया है कि मित्र ही मित्र का सबसे बड़ा राजदार होता है, सुख और दुःख का साथी होता है। मित्रों से संबंधित एक घटना का ज़िक्र अत्यंत आवश्यक है...
एक मित्र ने अपने एक मित्र के बारे में सच्चाई जानने के लिए आधी रात को मित्र के घर पहुंच कर आवाज़ देते हुए दरवाज़ा खटखटाया , मित्र ने एक हाथ में थैली और एक हाथ में तलवार लिए हुए दरवाजा खोला तो सामने वाले मित्र ने पूछा कि ये सब क्या है ?
मित्र ने जवाब दिया मेरा मित्र संकट में है तभी तो आधी रात को दरवाजा खटखटाया है, मित्र को धन की आवश्यकता होगी तो ये थैली और किसी शत्रु ने हमला किया होगा तो ये तलवार के साथ यह मित्र काम आयेगा। "दोस्ती की यादें ग्रुप" एक व्हाट्सएप ग्रुप है जिसमें मित्र अपने मित्रों का हाल-चाल समय-समय पर लेते रहते हैं। दोस्ती की यादें ग्रुप जिसमें अनुशासन की झलक की दिखती है इस ग्रुप में एक मैसेज को ही सभी आदेश मान कर नियत समय और स्थान पर उपस्थित हो जाते हैं, इस ग्रुप का मित्र मिलन समारोह प्रत्येक माह में दो-चार बार अवश्य हो जाता है, जो निरंतर 5 वर्षों से लगातार चला रहा है जो आगे भी चलता रहेगा। आज अपने व्यस्ततम समय में से समय निकालकर दोस्ती की यादें ग्रुप के सदस्यों ने जयप्रकाश उपाध्याय का 62 वां जन्मदिन 'केक हब' में बड़े ही धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर पूछे जाने पर ग्रुप नायक सुरेश सिंह ने मीडिया को बताया कि किसी ग्रुप बनाने का मुख्य उद्देश्य मित्रों का मित्रों के सुख दुःख में शामिल होना और सुख दुःख बांटना ही है। कार्यक्रम में शामिल मित्रों ने हास- परिहास से श्री उपाध्याय के जन्मदिन को और भी खास बना दिया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से सुरेश सिंह, विजय प्रताप सिंह, जगमोहन यादव, बृजभान सिंह, बृजेश पांडे, विजय शंकर चौरसिया, कैलाश तिवारी, डॉ० रमाशंकर, धनंजय शर्मा, जगदीश सिंह, हरिमोहन सिंह, अनिल सिंह, प्रमोद सिंह, बृजभूषण खरे, विजयपाल सिंह और शिवांशु उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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