शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया,पश्चिमी चंपारण, बिहार।
भगवान राम की अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाली उद्घाटन समारोह केअवसर पर बेतिया राज का रामदरबार जो जीर्णशीर्ण स्थिति में बहुत वर्षों से था,उसका भी पुनरुत्थान भी होने जा रहा है।राम मंदिर में राम ललला का विराजमान होते ही अयोध्याधाम के नया घाट स्थित बेतिया राज् के राम दरबार का स्वरूप भी बदल जाएगा। बिहार और यूपी की सरकार बेतिया राज के महाराज के द्वारा 400 वर्ष पुराना नागर शैली में बनवाये गए इस मंदिर का जीर्णोद्धार होने जा रहा है।यूपी सरकार इस मंदिर को राम मंदिर का पूरक मानते हुएभव्य स्वरूप देने जा रहा है।68.80 करोड़ के बजट में से लगभग 40 मंदिरों का कायाकल्प होने जा रहा है। रामनगरी आने वाले भक्त बेतिया के इस प्रसिद्ध मंदिर में बिहार राज्य का एक विरासत के रूप में देखेंगे। यहां हजारों साल पहले महाराजाओं के द्वारा बनाया गया भव्य मंदिर भी आकर्षण का केंद्र है। यूपी सरकार इस राम मंदिर को भव्य बनाने में केंद्र सरकार का खरबोखरब रुपया प्राप्त कर भव्य मंदिर बनाने में लगा हुआ है,जिसका भव्य उद्घाटन, प्रधानमंत्री के द्वारा 22 जनवरी को किया जाएगा,जोआगे के युग में देश-विदेश में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखेगा।
बेतिया के महाराज के द्वारा 1600 ईसवी में बनाए गए इस मंदिर का भी नाम है।बिहार सरकार की तरफ से बेतिया राज के व्यवस्थापक एवं अपर जिलाधिकारी,अखिलेश कुमार मंदिर के सर्वेक्षण के लिए एक टीमअयोध्या भेज रहे हैं।
स्थानीय बुजुर्गों ने विस्तार से संवाददाता को बताया कि अवध से बेतिया राज का आध्यात्मिक नाता रहा है, बेतिया के महाराजा नेअयोध्या में एक मंदिर का निर्माण करा करअवध नगरी से बेतिया को आध्यात्मिक रूप से जोड़ दिया बेतिया के कालीबाग, दुर्गाबाग,सागर पोखरा मंदिरों की तर्ज पर नागर शैली में बने इस मंदिर के शीर्ष पर इसका आज भी उल्लेख किया गया है।मंदिर वर्तमान में भले ही जीर्णशीर्ण है,लेकिन परागण में प्रवेश करते ही बेतिया से इसका जुड़ाव महसूस हो जाता है। प्रवेश द्वार पर महंत लक्ष्मण दास के नाम का शिलापट सीधा नजर आता है,हालांकि महंत जी के मरने के बाद इसकी सुधि किसी ने नहीं ली। बेतिया निवासी प्रशांत सौरभ संवाददाता को बताते हैं कि जब-जब अयोध्या में अप्रत्याशित घटना हुई,यहां के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।निधि समर्पण अभियान के दौरान भी बेतियावासियों ने पूरा सहयोग किया,आज भी अयोध्या में से आएअभिमंत्रित अक्षत को घर-घर तक उचित ढंग से पहुंचवाया गया है।
संवाददाता को यह भी पता चला है कि पूरे देश में बेतिया राज का 56 मंदिर अभी भी हैं।
बेतिया महाराज ने अपने जीवनकाल में धार्मिक स्थल का विकास व मंदिरों की स्थापना कराई थी,अभी भी 56 मंदिरों का विस्तृत लेखा-जोखा मिलता है। बेतिया महाराज ने सभी मंदिरों की देखरेख,पूजापाठ करने के लिए कई पुजारीयों को रखा था,इन मंदिरों में आज भी पूजा अर्चना होती है,सभी मंदिरों को नागर शैली में बड़े ही व्यापक, आकर्षक,मनमोहक,सुंदर ढंग से बनाया गया है। इन सभी मंदिरों के प्रांगण काफी लंबा चौड़ा,सुंदर,अति विकसित रूप में है।
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