सलमान अहमद
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
इलाहाबाद हाई कोर्ट मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद से जुड़े विचाराधीन 18 सिविल वादों में 15 की सुनवाई अब एक साथ करेगा। कोर्ट ने इनको भगवान श्रीकृष्ण विराजमान कटरा केशव देव मूल वाद में जोड़ लिया है। शेष दो केसों पर बाद में विचार किया जाएगा।
कोर्ट ने दिया यह तर्क।
कोर्ट ने कहा, सभी केस संयुक्त कर सुनवाई करने से कोर्ट के समय की बचत होगी, पक्षकारों के खर्च बचेंगे और फैसलों में भिन्नता नहीं होगी। समान प्रकृति के वादों को एक साथ जोड़ा जाना न्याय हित में जरूरी है।कोर्ट कमिश्नर की रूपरेखा तय करने के मामले की सुनवाई 17 जनवरी को होगी।यह आदेश न्यायमूर्ति मयंक जैन ने भगवान श्रीकृष्ण विराजमान कटरा केशव देव सहित सभी 17 वादों की सुनवाई करते हुए दिया है।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई बहस।
मंदिर पक्ष की तरफ से अधिवक्ता विष्णु जैन ने अर्जी दाखिल कर सभी वादों को संयुक्त कर सुनवाई करने की मांग की। जैन का कहना था कि मामला अतिआवश्यक है, जिसका शीघ्र निस्तारण न्याय हित में जरूरी है। मस्जिद पक्ष के वकीलों ने भी इससे सहमति जताई।
हालांकि वीडियो कान्फ्रेंसिंग से शामिल हुए महमूद प्राचा ने इसका विरोध किया किंतु उसी पक्ष के अधिवक्ता नसईरूज्जमा ने आपत्ति नहीं की।मंदिर पक्ष के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने भी वीडियो कांफ्रेंसिंग से बहस की। कहा, कोर्ट को समान प्रकृति के वादों को संयुक्त कर सुनवाई करने के लिए स्वत: संज्ञान अधिकार है। विष्णु जैन ने कहा, कोर्ट ने एडवोकेट कमिश्नर भेजने का आदेश दिया है। इसकी रूपरेखा तय की जानी है। हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज के साथ तीन वकीलों का कमीशन भेजा जा सकता है।
17 जनवरी तारीख तय।
पक्षकारों को भी साथ रहने की अनुमति दी जाए। वहीं, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता पुनीत गुप्ता के परिवार में शोक के कारण सुनवाई टालने की अर्जी दी गई है। इस पर कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 17 जनवरी तय कर दी। मंदिर पक्ष से प्रभाष पांडेय, प्रदीप शर्मा, मस्जिद पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता वजाहत हुसैन व न्यायमित्र मार्कंडेय राय सहित तमाम पक्षों के अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
सुनवाई शुरू होते ही मस्जिद पक्ष की तरफ से यह कहते हुए सुनवाई स्थगित करने की मांग की गई कि सर्वे कमीशन के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी लंबित है, जिसकी सुनवाई 16 जनवरी को संभव है।श्रीकृष्ण जन्मस्थान मुक्ति समिति की तरफ से एक पक्षकार के अधिवक्ता का यह भी कहना था कि विपक्षी शाही ईदगाह परिसर में तोड़फोड़ कर साक्ष्य समाप्त कर रहे हैं। अर्जी पर आपत्ति दाखिल करने का विपक्षी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अंतिम अवसर दिया गया था। इसके बावजूद आपत्ति दाखिल न कर सुनवाई में देरी की जा रही है। विवादित परिसर की दीवाल व गेट को नुकसान पहुंचाने की शिकायत की गई।
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