रौंसड़ा में 'श्री शतचंडी पांच कुंडीय महायज्ञ' का चौथा दिन
रिपोर्ट - धनंजय शर्मा
बिल्थरा रोड, बलिया।
रौंसड़ा गांव में चल रही श्री शतचंडी पांच कुंडीय महायज्ञ के चौथे दिन ब्रह्मलीन संत देवरहा बाबा के कृपा पात्र शिष्य कपिल देव दास जी ने बताया कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का आध्यात्म सबसे बड़ा मार्ग है, मानव अनंत आनंद का स्रोत है, हमारे मन को शीतल एवं पवित्र बनाए रखने में अध्यात्म का सबसे बड़ा योगदान होता है आध्यात्म से परमात्मा की महिमा को अच्छे से समझा जा सकता है और इसका एहसास भी प्राप्त किया जा सकता है। अध्यात्म हमें आत्म संतुष्टि प्रदान करते हैं। ईश्वर का नाम तो सभी लेते हैं लेकिन सिर्फ उनके नाम लेने से ही ईश्वर को नहीं पाया जा सकता बल्कि ईश्वर तक पहुंचने के लिए अध्यात्म का भाव परम आवश्यक है। आध्यात्मिकता सही मायने में मानव को जीना सिखाती है, सही मार्गदर्शन प्रदान करती है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को आध्यामिकता के महत्व को समझना चाहिए।
महायज्ञ में श्रद्धालु प्रतिदिन मध्याह्न 12:00 बजे और शाम 8:00 बजे से वृंदावन से पधारी रासलीला के सजीव मंचन का आनंद लेते हुए श्री शतचंडी पंच कुंडी महायज्ञ में बने यज्ञशाला का परिक्रमा कर रहे हैं।
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