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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के पात्र लाभार्थी को प्रति परिवार प्रति वर्ष पाॅच लाख रुपए की स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

ब्यूरो चीफ अंजुम शहाब की रिपोर्ट।

मुज़फ्फरपुर बिहार।

 इस बावत जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने समाहरणालय सभागार में संबंधित के साथ बैठक कर कई दिशा निर्देश दियें। उन्होंने बताया कि 02 मार्च से इसकी शुरूआत होगी। उक्त प्रथम तिथि को 2.50 लाख लोगों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। इसलिए कार्य योजना बनाते हुए मिशन मोड में काम करने का निदेश सिविल सर्जन एवं जिला आपूर्ति पदाधिकारी को दिया गया। जिले में 2433 पी.डी.एस.डीलर है, जबकि 318 काॅमन सर्विस सेन्टर कार्यशील है। रोस्टर बनाकर पंचायतवार सभी राशन कार्ड धारक/परिवार का स्वास्थ्य बीमा कार्ड बनाया जाए। इसके लिए उन्होंने डीलर के साथ-साथ आगनबाड़ी, आशा की भी आवश्यक सहयोग लेने का निदेश दिया। प्रखण्डों के वरीय प्रभारी पदाधिकारी इसकी माॅनेटरिंग करेंगे। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से आच्छादित होने के बाद बचे हुए लाभार्थियों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल करते हुए इसका संचालन आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के साथ एकीकृत रूप से करने का निदेश दिया गया। सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को डीलर, काॅमन सर्विस सेन्टर के साथ इस संबंध में बैठक करने का निदेश दिया गया। जिला एवं प्रखण्ड स्तर पर दैनिक अनुश्रवण करते हुए प्रतिवेदन भेजने की मांग की गयी।

स्वास्थ्य विभाग की कार्य की समीक्षा की गयी। जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने AES को लेकर पुनः निदेश दिया। उन्होंने कहा कि 15 मार्च से सभी चिन्हित पंचायतों चिन्हित पदाधिकारीगण जाकर AES से लोगों को जागरूक करेंगे। आई.सी.डी.एस., जीविका, स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका को बताते हुए उन्होंने कहा कि आई.सी.डी.एस. सेविका प्रतिदिन पंचायत में घरों में जाकर पंजी संधारित करते हुए रिपोर्ट प्राप्त करें। उन्होंने बच्चों का लाईन लिस्टिंग गंभीरता से करने को कहा। मातृत्व मृत्यु दर पर जिला पदाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त किया। शहरी पी.एच.सी. में ए.एम.सी. कमतर रहने पर कहा कि व्यवस्था सुधारें। उन्होंने कहा कि किसी भी पी.एच.सी. में किसी भी स्थिति में 90 प्रतिशत से कम ए.एम.सी. नहीं होनी चाहिए। प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक की यह व्यक्तिगत जिम्मेवारी है। संस्थागत प्रसव दर को बढ़ाने का निदेश दिया गया। पूर्ण टीकाकरण कम होने पर उन्होंने कहा कि वेसलाईन सर्वे और ड्यू लिस्ट को अद्यतन करें। पूर्ण टीकाकरण के संबंध में आई.सी.डी.एस. को भी निदेशित किया गया। आई.सी.डी.एस., आशा, प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधक, डी.सी.एम. ड्यू लिस्ट को अपडेट करेंगे, जिससे की टीकाकरण में तेजी आये। 15 मार्च के बाद टीकाकरण को लेकर गाॅव में विशेष अभियान चलायें। ओ.पी.डी. संचालन को लेकर उन्होंने कहा कि गाॅव, टोलो कस्बे में जाकर कैम्प लगायें। एन.आर.सी. में कुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता है। एन.आर.सी. में एक साथ 20 बच्चों का इलाज होता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सी.डी.पी.ओ. की यह जिम्मेवारी है कि अपने प्रखण्ड से पाॅच कुपोषित बच्चों को एन.आर.सी. पहुॅचायें। एन.आर.सी. में इलाज के बाद उन्हें एम्बुलेंस से मानदेय के साथ घर पहुॅचाने का भी प्रावधान है। बच्चों और अभिभावकों निःशुल्क भोजन भी दिया जाता है।

आई.सी.डी.एस. की समीक्षा में उन्होंने आगनबाड़ी केन्द्र भवन निर्माण, पोषण ट्रेकर, आधार सिडिंग, मातृत्व बंदन, कन्या उत्थान, परवरिश योजना आदि के कार्य योजना की समीक्षा हुई। पंचायत सरकार भवन में नियमित टीकाकरण किया जायेगा। प्रखण्ड विकास पदाधिकारी इसकी माॅनेटरिंग करेंगे। बैठक में उप विकास आयुक्त आशुतोष द्विवेदी, सिविल सर्जन, सभी पदाधिकारी, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी उपस्थित थें।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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