सैय्यद फरहान अहमद
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
वहीं चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में दर्स (व्याख्यान) के दौरान नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि कुर्बानी के जानवर को ऐब (दोष) से खाली होना चाहिए। अगर थोड़ा से ऐब हो तो कुर्बानी हो जाएगी मगर मकरुह होगी और ज्यादा हो तो कुर्बानी होगी ही नहीं। अंधे जानवर की कुर्बानी जायज़ नहीं इतना कमजोर जिसकी हड्डियां नजर आती हों और लंगड़ा जो कुर्बानीगाह तक अपने पांव से जा न सके और इतना बीमार जिसकी बीमारी जाहिर हो जिसके कान या दुम तिहाई से ज्यादा कटे हों इन सब की कुर्बानी जायज़ नहीं। साफ-सफाई का सभी खास ख्याल रखें।
मौलाना महमूद रज़ा कादरी ने बताया कि कुर्बानी में भेड़, बकरी, दुंबा सिर्फ एक आदमी की तरफ से एक जानवर होना चाहिए और भैंस में सात आदमी शिरकत कर सकते हैं। कुर्बानी के लिए भैंस दो साल, बकरा-बकरी एक साल का होना चाहिए। कुर्बानी और अकीका की शिरकत हो सकती है।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर अमनो अमान की दुआ मांगी गई। दर्स में मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी, हाफिज नजरे आलम कादरी, हाफिज शारिक, नवाज अहमद, हाफिज सैफ रज़ा इस्माईली, शमशीर अहमद, फुजैल अहमद, मुन्ना अली, यासीन अहमद आदि ने शिरकत की।
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