रिपोर्ट विनोद विरोधी
गया।विश्व प्रसिद्ध मोक्ष स्थल गया का विष्णुपद श्मशान घाट पर स्थित दो- दो शव दाह गृह तथा नैली स्थित पशु शव दाह गृह शोभा का वस्तु बना हुआ है । विष्णुपद स्थित श्मशान घाट पर गया नगर निगम द्वारा दो स्थानो पर शव दाह गृह बनाया गया, जो कुछ ही दिनों में खराब होकर बंद पड़ा है।नित्य दिन सम्पूर्ण गया जिला सहित मगध प्रमंडल के कोने-कोने से विश्व प्रसिद्ध मोक्षधाम के मान्यता के चलते आने वाले सैकड़ों शव लोग एक छोटा शेड या फल्गु नदी में लकड़ी खरीद कर शव जलाने को मजबूर हैं।दूसरी ओर नैली स्थित कुड़ा डंपिंग जोन में निर्मित पशु शव दाह गृह का भी हालत यही है ।यहां आज तक कोई भी पशु का दाह संस्कार हुआ ही नहीं हैं। बताया जाता हैं कि गया विष्णु पद स्थित श्मशान घाट पर दाह संस्कार करने आने वाले लोग कड़ी धूप, पानी में लकड़ी खरीद कर शव जलते हैं। लोगों को बैठने वाला भी कमरा हमेशा बंद रहता है। ना तो वहां बेहतर पेयजल की व्यवस्था है, ना ही बैठने की जगह । जबकि उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश के वाराणसी का मणिका घाट तथा बिहार के गया का विष्णुपद श्मशान घाट की पौराणिक मान्यता है कि इन दोनों स्थानो पर दाह संस्कार से मोक्ष की प्राप्ति होती है।लोगों का कहना है कि विष्णुपद स्थित मानव शव दाह गृह एवं नैली स्थित पशु शव दाह गृह के निर्माण में करोड़ों रुपये गया नगर निगम द्वारा खर्च किया गया है। लेकिन निगम की उदासीनता के कारण यह शोभा की वस्तु बनी हैं। इधर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रतिनिधि प्रो विजय कुमार मिट्ठू ने बिहार सरकार , स्थानीय प्रशासन एवं गया नगर निगम से अविलंब शोभा की वस्तु बनी शव दाह गृह को चालू करने तथा आमजन हेतू बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की मांग किया है।
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