संस्था चुनाव होने थे 3 वर्ष में बिता दिए 15 साल
कुरैशी समाज के लोगों ने दर्ज कराई रिपोर्ट।
आय-व्यय पेश कर संस्था के चुनाव कराने की उठी आवाज
जमीयतुल कुरैश पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज
अब्दुल्ला
जयपुर, राजस्थान।
एमडी रोड स्थित जमीयतुल कुरैश संस्था के चुनाव नहीं कराए जाने तथा संस्था का लेखा-जोखा, हिसाब पेश नहीं किए जाने को लेकर समाज के कुछ लोगों ने परिवाद के जरिए स्थानीय पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है। जिसमें वर्तमान अध्यक्ष, सचिव व कोषाध्यक्ष को आरोपी बनाते हुए संस्था के शीघ्र चुनाव कराने तथा संपूर्ण लेखे-जोखे के साथ समाज के समक्ष हिसाब पेश करने की बात कही गई है।
दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीयतुल कुरैश पंजीकृत संस्था है। जिसके तहत जमात खाना कुरैशियान, विद्यालय, मस्जिद, करीब 11 दुकानें आदि संचालित है। जमाअत खाना धर्मशाला के रूप में संचालित है, जिसमें करीब 60-70 कमरे बने हुए है, जो कि समाज के लोगों व आमजन के लिए किराये पर संचालित है। इसके अलावा शादी-विवाह के बर्तनों का ठेका दिया हुआ है, जिससे करीब 4 लाख रुपए प्रतिवर्ष की आय होती है। शादी-विवाह के जरिए संस्था को समाज द्वारा लाखों रुपए का चंदा भी प्राप्त होता है।
इन्होंने, इन्हें बनाया अभियुक्त
अब्दुल हमीद कुरैशी, मोहम्मद यामीन कुरैशी, मोहम्मद मोबीन कुरैशी, मोहम्मद शहजाद कुरैशी, नईमुद्दीन कुरैशी, मोहम्मद साजिद कुरैशी, मोहम्मद आरिफ , मोहम्मद सलीम कुरैशी, मो. रियाज कुरैशी आदि की ओर से दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि संस्था के वर्ष 2009 से अभियुक्त अब्दुल हफीज अध्यक्ष, इस्लामुद्दीन (एमडी) सचिव तथा अब्दुल वहाब कुरैशी कोषाध्यक्ष के रूप में अवैधानिक रूप से पदों पर काबिज है। इन्होंने 2009 से संस्था की आमदनी व अन्य आय के स्रोतों से होने वाली आमदनी का आज तक ना तो कोई लेखा-जोखा, हिसाब-किताब समाज के समक्ष रखा और ना ही इसे सार्वजनिक रूप में उजागर किया है।
आय का कभी नहीं किया खुलासा, गबन का आरोप
दर्ज रिपोर्ट में कहा गया कि अभियुक्तों द्वारा नमाज के दौरान मस्जिद में होने वाली आय का भी कभी खुलासा नहीं किया है और बैंक स्टेटमेन्ट भी कभी नोटिस बोर्ड पर चस्पा नहीं किया। इन पर करोड़ों रुपए की आय का गबन किए जाने का आरोप रिपोर्ट में लगाया है। संस्था के आय-व्यय का लेखा-जोखा रजिस्ट्रार को भी आज तक उपलब्ध नहीं करवाया है। अभियुक्तों द्वारा आय विवरणिका ना तो आयकर विभाग में पेश की और ना ही रजिस्ट्रार को प्रस्तुत की गई। संस्था के पैन नंबर से समाज के लोगों को भी अवगत नहीं करवाया है। दर्ज रिपोर्ट में कहा गया है कि अभियुक्तों द्वारा आज तक संस्था का समाज को न तो हिसाब पेश किया और ना ही पंद्रह वर्षों से चुनाव कराए हैं। जिसके चलते समाज के लोग संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं।
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