हफ़ीज अहमद खान
कानपुर नगर उत्तर प्रदेश।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) द्वारा आईएपी एडोलेसेन्ट वीक मे कन्या दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 40 एमबीबीएस छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में बेटियों के महत्व को उजागर करना और उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, एवं समग्र विकास के प्रति जागरूकता फैलाना था।कार्यक्रम का संचालन डॉ. यशवंत राव ने किया, उन्होंने बेटियों के जीवन में भूमिका और उनके प्रति समाज की जिम्मेदारियों पर गहन दृष्टिकोण साझा किया।
डॉ. यशवंत राव ने बताया कि आज भी हमारे देश में लिंग अनुपात 914 लड़कियाँ प्रति 1000 लड़कों का है। हर 3 में से 1 लड़की अपने जीवन के पहले साल में ही मृत्यु का शिकार हो जाती है, और हर 4 में से 1 लड़की अपनी 15वीं वर्षगांठ मनाने से पहले ही जीवन खो देती है। 5 में से 2 लड़कियाँ कुपोषित हैं, और हर दूसरी किशोरी एनीमिया से ग्रसित होती है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में 30% महिलाएँ कम उम्र में शारीरिक या यौन हिंसा का सामना करती हैं।बाल रोग अकादमी, कानपुर के सचिव डॉ. अमितेश यादव ने कहा कि आज की बेटी: बालिका, हमारा वर्तमान और भविष्य है। वह एक सृजनकर्ता और पालनकर्ता है, इसलिए हमें उसकी सेहत और पोषण का ध्यान रखना चाहिए, विशेष रूप से एनीमिया की रोकथाम पर जोर देना चाहिए। उन्होंने पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के बारे में भी जानकारी दी कि यह एक जेंडर न्यूट्रल कानून है, जो 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों के लिए लागू होता है। यह कानून बच्चों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए रिपोर्टिंग, पुनः समन्वय और परीक्षण की प्रक्रिया को बाल-सुलभ बनाता है। उन्होंने बताया कि बाल यौन शोषण के मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग जरूरी है और 1098 या 112 हेल्पलाइन का उपयोग करके इनकी सूचना दी जा सकती है।कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने बेटियों के सम्मान और उनकी भलाई के लिए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। डा प्रतिभा सिंह, डा सौरभ, डा नरेश, डा प्रज्ञा ने भी अपने विचार प्रकट किया।
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