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स्वर्गीय मैनावती देवी श्रीवास्तव की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित हुआ काव्य गोष्ठी।

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश

भोजपुरी की सुप्रसिद्ध लोक गायिका एवं कवियत्री आकाशवाणी एवं दूरदर्शन में अपनी प्रस्तुति से लोगों के दिलों पर राज करने वाली स्वर्गीय मैनावती देवी श्रीवास्तव की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित हुआ काव्य गोष्ठी।

भोजपुरी की सुप्रसिद्ध लोक गायिका आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर अपनी प्रस्तुति से लोगों के दिलों पर राज करने वाली स्वर्गीय मैनावती देवी की पुण्य तिथि के अवसर पर उनके अलीनगर स्थित आवास पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें कविता के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई कार्यक्रम की अध्यक्षता भोजपुरी के सुप्रसिद्ध कवि श्री सुभाष यादव ने किया जबकि कार्यक्रम का संचालन मिन्नत गोरखपुरी ने किया।

 उनके पौत्र अमन चंद्र ने सभी को अंग वस्त्र देकर सब का सम्मान और स्वागत किया।

गौतम गोरखपुरी ने पढ़ा - 

दुनियां में इक बेटे की खातिर, 

इक माँ से बढ़‌कर क्या होता है।

प्रेम नाथ मिश्र ने पढ़ा- 

एक पिता ने दस-दस बच्चे, पाल लिए आसानी से दस-दस बच्चे एक पिता को मिलकर पाल नहीं पाते।

मुकेश श्रीवास्तव आचार्य ने पढ़ा- 

कहीं रखकर भूल गया हूँ तुमको ढूँढ़ता हूँ मगर तु कहीं पाता ही नहीं।

वरिष्ठ कवि राजेश राज ने पढ़ा-

केवल नज़र नहीं आने को जाना थोड़ी कहते हैं। पहले नज़रों में रहती थी अब वो दिल में

सुभाष चन्द्र यादव ने पढ़ा- 

जग में माई बिना केहुने सहारे ना होई। 

केहू केतनो दुलारी बाकिर माई ना होई ।।

इस अवसर पर सैय्यद असिम रऊफ, मिन्नत गोरखपुरी, डॉक्टर सत्यमवदा शर्मा,श्रीमती सुधा मोदी, डॉक्टर सरिता सिंह,अजय यादव आदि ने काव्य पाठ किया |

इस अवसर पर शिवेंद्र पांडेय, त्रिभुवन मणि त्रिपाठी,शुभम जायसवाल,पल्लवी शर्मा आदि उपस्थित रहे |

अंत में कार्यक्रम के संयोजक अंतराष्ट्रीय लोक गायक डॉ राकेश श्रीवास्तव ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया |

Karunakar Ram Tripathi
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