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जमीयतुल कुरैश के सदर की कोशिशें रंग लाई, शरई तरीके से कराया बेटे का निकाह।

-बिजनेसमैन छुट्टन कुरैशी ने भी पेश की शानदार मिसाल, बेटी का निकाह नो गार्डन, नो डिनर, नो दहेज कर दिया संदेश

वसीम अकरम कुरैशी

जयपुर, राजस्थान

आॅल इंडिया जमीयतुल कुरैश के राजस्थान सदर एवं वरिष्ठ समाजसेवी नईमुद्दीन कुरैशी (इंडियाना) की कोशिशें और पहल आखिर कामयाब हुई। इनकी इच्छा रही है कि वे कौम व समाज में ऐसी मिसाल पेश करें जिससे कि लोगों को फिजूलखर्ची और गैर जरुरी रस्मों-रिवाज पर पाबंदी लगे। इनके ये प्रयास आज यहां रंग लाए। इन्होंने अपने बेटे शादाब ( ग्रेजुएट) की शादी इस्लामी तरीके से करते हुए शर्बत व खिजूर पर निकाह कराया। वहीं नईमुद्दीन कुरैशी की कोशिशों में पूरा साथ दिया झोटवाड़ा निवासी छुट्टन कुरैशी व इनके बेटे इमरान कुरैशी एवं बेटी सानिया (पोस्ट ग्रेजुएट) ने।

 छुट्टन कुरैशी की बेटी दीनी तर्बियतयाफ्ता सानिया की भी ख्वाहिश थी कि उसका रिश्ता दीनदार घराने में हो। शरीयत पर अमल करते हुए आज दोनों ही खानदानों ने अपने बच्चे व बच्ची का निकाह सादगी के साथ मस्जिद में कराया। आने वाले मेहमानों को शर्बत व खिजूर पेश कर मेहमान नवाजी की गई।

बता दें कि राजस्थान के वरिष्ठ समाजसेवी छुट्टन कुरैशी ने गत दिनों अपनी बेटी का रिश्ता नईमुद्दीन कुरैशी के बेटे के साथ मात्र दो रुपए सलाम-मुद्दे के देकर सादगी के साथ रस्म अदायगी की थी। तयशुदा उसी रिश्ते को आगे बढ़ाते हुए आज शरई तरीके से निकाह हुआ। निकाह की रस्म मस्जिद में अदा कराने के बाद लड़की वालों ने दुल्हा पक्ष व बारातियों को खिजूर व शर्बत पिलाकर सादगी के साथ छुट्टन कुरैशी व उनके बेटे इमरान कुरैशी ने अपनी लख्ते जिगर को बेहद सादगी के साथ रुखसत किया।

छुट्टन कुरैशी व नईमुद्दीन कुरैशी ने अपनी बेटी व बेटे की शरीयत के मुताबिक शादी करके ऐसी अनोखी मिसाल पेश की है जो लोगों के लिए राह हमवार करेगी। वहीं छुट्टन कुरैशी व उनके पुत्र इमरान कुरैशी ने नो मैरिज गार्डन, नो दहेज, नो डिनर के शादी कर मिसाल कायम की है। इन्होंने शर्बत व खिजूर पर निकाह कराकर सुन्नत तरीके के इस पैगाम को आम व खास तक पहुंचा कर बड़ा पैगाम दिया है।  

निकाह को आसान बनाए : छुट्टन कुरैशी

छुट्टन कुरैशी ने कहा कि दहेज लेने और देने की प्रथा इस्लाम का हिस्सा नहीं है। निकाह को आसान बनाएं, फिजूलखर्ची से बचें। छुट्टन कुरैशी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि तालीम, रोजगार व अन्य आवश्यक कार्य के लिए खर्च करें। निकाह एक तरह से दो परिवार को जोड़ने का जरिया है। इसमें दिखावे की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दहेज लेने और देने की प्रथा इस्लाम का हिस्सा नहीं है।

मस्जिदों में सादगी से निकाह करें : नईमुद्दीन

वहीं दुल्हे के पिता नईमुद्दीन कुरैशी ने कहा कि मैंने अपने बच्चे का निकाह इस्लामी तरीके से करने की कोशिश की है। बेटे का निकाह शरीयत के मुताबिक करके लोगों को पैगाम दिया है कि निकाह को आसान करें और इस मामले में इस्लामी उसूलों की पाबंदी से पालना करें। उन्होंने लोगों से शादी में होने वाली फिजूलखर्ची को छोड़ने, मस्जिदों में सादगी से निकाह करने और दहेज लेन-देन को पूरी तरह छोड़ने की अपील की है।

दुल्हा-दुल्हन ने निकाह को किया आसान

बता दें कि वरिष्ठ समाजसेवी छुट्टन कुरैशी की बेटी सानिया और आॅल इंडिया जमीयतुल कुरैश राजस्थान के सदर नईमुद्दीन कुरैशी के बेटे शादाब ने दहेज वगैरा लेने-देने से इनकार कर दिया और अवाम को एक पैगाम दिया कि निकाह को आसान करें, जिससे गरीब मां-बाप अपनी बेटी का निकाह आसानी से कर सके। निकाह में फिजूलखर्ची करके अपनी जिंदगियों को तबाह-बर्बाद ना करें।

फिजूलखर्ची बंद हो, बच्चों की तालीम पर खर्च करें : इमरान

वहीं, दुल्हन सानिया के भाई एवं कांग्रेस के युवा नेता इमरान कुरैशी ने कहा कि दहेज एक बड़ी समस्या है। बच्चों की शादियां-निकाह चुनौती बनती जा रही है। कई बेटियों की तो शादियों में इसी कारण देरी होती जा रही कि दहेज व बारातियों पर खर्च सहन नहीं हो पाता। कई जगह दहेज के कारण रिश्ता टूट जाता है, इसलिए दहेज जैसी प्रथाओं पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। शादियों में अनावश्यक खर्च करने से बेहतर है कि उसे बच्चों की शिक्षा पर खर्च करें। उन्होंने लोगों से शादी में होने वाली फिजूलखर्ची को छोड़ने, मस्जिदों में सादगी से निकाह करने और दहेज लेन-देन को पूरी तरह छोड़ने का आह्वान किया।

Karunakar Ram Tripathi
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