धनंजय शर्मा
बलिया, उत्तर प्रदेश।
भारतीय ॐ श्री विश्वकर्मा विकास परिषद" के तत्वावधान में आज बुधवार को स्थानीय भृगु आश्रम परिसर में भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्व० ज्ञानी जैल सिंह की पुण्यतिथि पर विश्वकर्मा समाज का कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसमें विश्वकर्मा समाज से जुड़े कवियों एवं पत्रकारों को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत भगवान विश्वकर्मा के पूजन व स्वर्गीय ज्ञानी जैल सिंह के तैल चित्र पर कार्यक्रम संयोजक के साथ मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि द्वारा माल्यार्पण के साथ हुई।
कवि लाल साहब सत्यार्थी की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन में उपस्थित कवियों डॉ० अमलदार निहार, हृदय नारायण हेहर, सुरेंद्र शर्मा विशाल, डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु', सुनील सरदास पुरी, नंद जी नंदा आदि ने उपस्थित श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया।
मुख्य अतिथि सहित उपस्थित सभी वक्ताओं ने स्वर्गीय ज्ञानी जैल सिंह के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए विश्वकर्मा समाज से शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही।
विशिष्ट अतिथि सत्येंद्र कुमार शर्मा ने जिला मुख्यालय पर विश्वकर्मा भवन और विश्वकर्मा ग्रंथ के प्रकाशन पर बल देते हुए प्रबुद्ध लोगों से सहयोग की अपील की।
विशिष्ट अतिथि श्याम मनोहर उर्फ हिटलर विश्वकर्मा ने अपने ओजस्वी भाषण से स्व० ज्ञानी जैल सिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की अपील करते हुए बताया कि स्व० जैल सिंह 14 भारतीय भाषाओं का ज्ञान रखते थे।
कार्यक्रम में जिले के विश्वकर्मा समाज के पत्रकारों को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया सम्मानित होने वाले पत्रकारों में प्रमुख रूप से धनंजय कुमार शर्मा, ओम प्रकाश शर्मा, सीताराम शर्मा, श्यामजीत शर्मा, घनश्याम शर्मा, रूद्रेश शर्मा, सुग्रीव शर्मा आदि प्रमुख रहे।
इस अवसर पर विश्वकर्मा समाज के कक्षा 10 व 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को काफी, कलम व स्मृति चिन्ह देखकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम संयोजक शिवनाथ विश्वकर्मा ने समाज के लोगों से समाज के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि जिले में विश्वकर्मा समाज के कई संगठन काम कर रहे हैं और सबका एक ही उद्देश्य है समाज का भला। जब भी आवश्यकता होगी सारे संगठन एक मंच पर होंगे। उन्होंने आगंतुकों का उनके आगमन पर आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का शानदार संचालन कवि डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु' ने किया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से रामजी शर्मा (पहलवान), रमेश विश्वकर्मा, बृजेश कुमार, रमाशंकर शर्मा, ईश्वर चंद्र शर्मा, कमल कुमार शर्मा, प्रताप नारायण विश्वकर्मा, रामप्रवेश विश्वकर्मा, श्यामलाल शर्मा, रामजी शर्मा आदि सहित हजारों लोग मौजूद रहे।
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