संतकबीरनगर, उत्तर प्रदेश।
श्रीलक्ष्मी नारायण मंदिर में चल रही गो-भागवत कथा में गोवत्स स्वामी डा. विनय ने कहा कि गो-सेवा सबसे पुनीत कार्य है। गो-भागवत कथा से गो माता की कृपा पाने की युक्ति व सांसारिक दुखों से मुक्ति मिलती है।
गोवत्स स्वामी शुक्रवार शहर के गोला बाजार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गो-आयाम एवं कामधेनु शक्तिपीठ के संयुक्त तत्वावधान शहर के गोला बाजार में पांच दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन का प्रसंग सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीराम की बारात अयोध्या से निकल रही थी तो बरात के आगे आगे नंदी रूपी धर्म चल रहा था। भगवान शंकर ने महाराज दशरथ से बारात के आगे-आगे धर्म को चलने के लिए कहा लेकिन आज समाज द्वारा नंदी का उपहास हो रहा है। इसलिए अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है।कथा व्यास से एकादशी तिथि का महत्व बताते भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा व प्रभु की बाल लीला का विस्तार से वर्णन किया। भगवान श्रीकृष्ण बहुत कम उम्र में ही यह जान गए थे कि पुतना का दूध जहरीला होता है लेकिन आज समाज के लोग जर्सी गाय रूपी पूतना को नहीं समझ पा रहे हैं। गो-माता की आरती हुई। संगीतमय भजनों पर श्रोता मुग्ध रहे। पावन कथा सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य रक्षा के साथ मंगल कामनाओं की पूर्ति में सहायक है। जिन पर गो-माता की कृपा हो उनका जीवन धन्य होता है।
इस मौके पर अखिलेश्वरधर द्विवेदी, उमेश सिंह, अमरनाथ रुंगटा, विष्णु श्रीवास्तव, खंड शिक्षाधिकारी ज्ञानचंद्र मिश्रा, समाजसेवी अमिताभ यादव,पंडित श्याम नारायण तिवारी, रामकुमार सिंह, सुरेश रुंगटा, सूरज वर्मा, विपिन चंद्र जोशी, राजू तिवारी, सूरज वर्मा, राजकुमार शर्मा, कृष्ण कुमार पांडे, देवेंद्र सिंह, शुभकरण विश्वकर्मा, पं.अनिरुद्ध पांडेय, शिखा अग्रहरि, पुष्पावती, सावित्री देवी, अरूण कुमार तिवारी़ शिखा अग्रहरि, अर्चना श्रीवास्तव, विनीता, पुरूपावती, दीपमाला, रीना दत्ता, मेनका तिवारी, विभा, अरुधति, साधना सिंह, ममता मिश्रा, शालिनी वर्मा सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
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