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दो दिवसीय फ़िक़्र ए हुसैन कॉन्फ्रेन्स का हुआ समापन।

पटना, बिहार। 

दिल्ली पब्लिक स्कूल, कादिराबाद और विश्व शांति ने संयुक्त रूप से दो दिवसीय फ़िक़्र ए हुसैन कॉन्फ्रेन्स का आयोजन किया। इस आयोजन में देश विदेश से कई लोग ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। विश्व शांति के मुख्य संपादक सैय्यद दानिश ने बताया कि इस कॉन्फ्रेन्स में फ्रांस, ग्रीस, मेक्सिको, बांग्लादेश, अमेरिका, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, यूगांडा समेत भारत से कई लोग शामिल हुए। उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन का सभी धर्म के लोग सम्मान करते हैं। हक़ और बातिल की लड़ाई में इमाम हुसैन ने अपना सबकुछ लुटा दिया और सच्चाई का समर्थन किया। दिल्ली पब्लिक स्कूल के निदेशक डॉ0 शोएब अहमद खान ने कहा कि महापुरुषों के बारे में लोगों को बताना चाहिए क्योंकि आज की पीढ़ी इंस्टाग्राम रील बनाने और पश्चिमी सभ्यता की नकल करने में रुचि लेने लगी है। उन्होंने कहा कि बदलाव की शुरुआत कोई भी कर सकता है इसके लिए किसी मंच की ज़रूरत नहीं और वो काम कर्बला में इमाम हुसैन ने कर के दिखाया है। उन्होंने सच्चाई का मंच थामा और उसके ज़रिए लड़ाई जीती। ग्रीस के शिक्षा व धार्मिक मंत्रालय में काम करने वाली रानिया लैम्पू ने कहा कि आज दया, प्रेम, शांति, करूणा, मानवता की ज़्यादा ज़रूरत है। इस तरह कर वेबिनार करने से समाज मर जागरूकता फैलता है और बच्चे महापुरुष के बारे में जानते हैं। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन सच्चाई के प्रतीक हैं और उन्हें हर दौर में शांति का दूत कहकर याद किया जाता रहेगा। फ्रांस से क्वीन नादिया हरिहरी ने अपने संबोधन में कहा कि इमाम हुसैन इस्लाम के सच्चे सिपाही साबित हुए जिन्होंने कर्बला में इस्लाम की नीतियों को मज़बूत किया। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने इस्लाम को एक नई दिशा दी जिसे नकारा नहीं जा सकता। ये कार्यक्रम ज़ूम द्वारा आयोजित किया गया जिसमें कई लोग शामिल हुए।

Karunakar Ram Tripathi
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