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सबसे बड़ा धन है ज्ञान- करुणाकर राम त्रिपाठी

महाराजगंज, उत्तर प्रदेश 

बसंत पंचमी के दिन ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। मां सरस्वती ज्ञान, विद्या, कला और संगीत की देवी हैं। कहा जाता है कि प्राचीन काल में भगवान ब्रह्मा के आदेश पर सरस्वती मां ने अपनी वीणा से इस संसार को वाणी प्रदान की थी। हमारे देश में विकास और प्रगति की चाहे जितनी भी परिभाषाएं बदली हो या भौतिकतावाद ने अपनी कितनी भी जड़े समाज में पसारी हो फिर भी यह बात शाश्वत सत्य है कि हमारे देश में ज्ञान और विद्या का महत्व आज भी सर्वोपरि है। ऐसा आभास अवश्य होता है कि भौतिकतावाद और व्यावहारिकता की आंधी में ज्ञान का महत्व कुछ कम हुआ है, लेकिन अगर हम उनके मूल में जाकर देखें तो ज्ञान की किसी नई विधा का संचरण होता ही दिखाई देगा। ऐसे में बदलते समय के साथ ज्ञान के संपादन तथा अर्जन का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन ज्ञान का महत्व कम नहीं हो सकता। 

 हमारे दर्शन में ज्ञान को सर्वश्रेष्ठ निधि कहा गया है। गीता के चौथे अध्याय में कहा गया है कि "न हि ज्ञानेंन संदृशं पवित्रमिह विद्यते। " अर्थात ज्ञान के प्रभाव के कारण ज्ञान के समान पवित्र और शुद्ध करने वाला और कुछ नहीं है। हमारे शास्त्रों में ज्ञान की उपासना ज्ञान की आराधना और ज्ञान के दान का सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। हमारे यहां अलग-अलग प्रकार के दान दिए जाने की परंपरा है जैसे अन्न दान, वस्त्रदान, आभूषण दान, भूदान, औषधि- चिकित्सा दान इत्यादि। कहा जाता है कि इनमें से कोई भी दान करने पर आपको वह अगले जन्म में प्राप्त हो जाता है। यह समय की चक्रीय अवधारणा के कारण भी विचार दर्शन में है, लेकिन ज्ञान का दान ही ऐसा दान है जो लौटाया नहीं जा सकता है।इसलिए ज्ञान का प्रणयन करने वाले गुरु से कभी उऋण नहीं हुआ जा सकता। हमारे शास्त्रों में विद्या सबसे बड़ा धन है।

 आज यह योग महत्वपूर्ण और दुर्लभ है कि जब प्रयागराज में महाकुंभ हो रहा है और इसी में है अमृत स्नान का पर्व, विद्या और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती का उत्सव 'बसंत पंचमी' भी है। कुंभ तो मूलत: तप, साधना, ध्यान, विमर्श और वैचारिक आदान-प्रदान का ही पर्व है। कुंभ के दौरान ऐसी अनेक महत्वपूर्ण मंत्रणाए हुआ करती थी, जो आने वाले समय का मार्ग और व्यवहार तय करती थी।

 कुंभ ज्ञान के मंथन का अवसर है और इसी से ज्ञान की ऊर्जा का विस्तार होता है और विचारों के नए गवाक्ष खुलते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर मां सरस्वती का पूजन अत्यंत कल्याणकारी और मंगलकारी है। ऐसा योग बिरले ही आता है इसलिए इस ज्ञान की साधना और अवधारणा को समझने के लिए सर्वश्रेष्ठ समय कहा जा सकता है।

Karunakar Ram Tripathi
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