निरंतरता और अनुशासन ही शैक्षिक उन्नयन का मूल आधार
(गोरखपुर) दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के शिक्षा शास्त्र विभाग में बी.एड, एम.एड एवं एम.ए के नव प्रवेशित विद्यार्थियों का दीक्षारंभ कार्यक्रम विभाग में सम्पन्न हुआ, दीक्षारम्भ विद्यार्थी के लिए शिक्षार्थी जीवन के प्रारंभ से लेकर दीक्षांत तक की यात्रा के लिए दिए गए निर्देश हेतु संचालित कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की सुविधाओं एवं हितों को दृष्टिगत रखते हुए जितने भी सुविधा प्रदान की जा रही है उनके बारे में जानकारी रखना विद्यार्थी का भी परम कर्तव्य है, उक्त बातें कार्यक्रम की मुख्य अतिथि छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. अनुभूति दुबे ने कही l दीक्षारम्भ कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाशास्त्र विभाग की अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. सुनीता दुबे ने किया, अध्यक्षता कर रहीं प्रो. सुनीता दुबे ने अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भावी शिक्षक एवं प्रशिक्षक के गुण और दक्षताएँ अपने प्रशिक्षण काल में नियमित एवँ अनुशासित रहते सीखनी चाहिए, शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण की पवित्रता एवँ मौलिकता बनाये रखते हुए संकल्पित होकर राष्ट्र एवं समाज हित मे अपना योगदान दे। कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. सुषमा पाण्डेय ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल शिक्षण के उच्च मानकों से परिचित कराने का माध्यम है, अपितु उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों, शिक्षक की भूमिका एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की समझ से भी समृद्ध करेगा। कार्यक्रम को प्रमुख रूप से कार्यक्रम की संयोजिका प्रो. सुषमा पाण्डेय , प्रो. उदय सिंह, डॉ. राजेश कुमार सिंह, डॉ. ममता चौधरी, डॉ. मीतू सिंह, डॉ. दुर्गेश पाल, डॉ. ज्योति बाला, डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डॉ. अर्जुन सोनकर आदि ने संबोधित किया, साथ ही सभी ने नव प्रवेशित विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए और छात्रों को प्रशिक्षण के सभी मानदंडों को पूरा करते हुए खुशी और आनंद के साथ प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया और बताया की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के सभी मानदंडों को पूरा करना है l
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