हफीज़ अहमद खान
कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर शाखा द्वारा विश्व आत्महत्या निवारण जागरूकता दिवस के अवसर पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन आई.एम.ए. कॉन्फ्रेंस हॉल,टेम्पल ऑफ सर्विस 37/7, परेड, कानपुर में किया गया।इस वर्ष की थीम रही (आत्महत्या के बारे में सोच बदलना)।प्रेस वार्ता को डॉ. नंदिनी रस्तोगी (अध्यक्ष), डॉ. विकास मिश्रा (सचिव), डॉ. कुणाल साहाई (उपाध्यक्ष) एवं डॉ. मधुकर कटियार, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (मनोचिकित्सा), रामा मेडिकल कॉलेज, कानपुर ने संबोधित किया।इस अवसर पर विशेषज्ञों ने आत्महत्या जैसे गंभीर सामाजिक एवं चिकित्सकीय विषय पर विस्तृत जानकारी दी तथा समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की।10 सितंबर 2025 को, दुनिया भर के लोग और संगठन विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (WSPD) को "आत्महत्या की अवधारणा में बदलाव" की त्रिवार्षिक थीम के तहत मनाने के लिए एकजुट होंगे।
आत्महत्या पर धारणा बदलने का मतलब है चुप्पी, कलंक और गलतफहमी को खुलेपन, सहानुभूति और समर्थन में बदलना। हर किसी की अपनी भूमिका है। व्यक्तियों द्वारा अपने प्रियजनों से संपर्क करने से लेकर, समुदायों द्वारा सुरक्षित स्थान बनाने तक, सरकारों द्वारा नीतियां बनाने और संसाधनों का आवंटन करने तक - हम सब मिलकर इस कहानी को बदल सकते हैं और एक ऐसे विश्व की दिशा में काम कर सकते हैं जहां आत्महत्या को रोका जा सके और प्रत्येक जीवन को महत्व दिया जा सके।
आत्महत्या और मीडिया की भूमिका
मनोचिकित्सक और मुख्य संपादक समाचार और विचार प्रोफेसर डॉ.मधुकर कटियार ने कहा शोध से पता चलता है कि आत्महत्या और आत्महत्या की रोकथाम के मीडिया चित्रण का दूसरों पर प्रभाव पड़ सकता है।
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