वसीम अकरम कुरैशी
जयपुर, राजस्थान
देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र के समरावता मामले को लेकर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को ज्ञापन देकर पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिए जाने का आग्रह किया है। परिषद के प्रदेशाध्यक्ष केसी घुमरिया के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में बताया कि टोंक जिले के समरावता में गत वर्ष 13 नवम्बर को उपचुनाव के दिन मतदान समाप्त होने के बाद पुलिस और प्रशासन द्वारा किए गए अमानवीय अत्याचार और संवेदनहीन कृत्यों की संपूर्ण रिपोर्ट के साथ ज्ञापन मुख्यमंत्री व केंद्र सरकार को भी देकर तथ्यों के साथ विस्तार से बताया गया, किंतु आज दिन तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
घुमरिया ने बताया कि प्रकरण की शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग दिल्ली, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दिल्ली और चैयरमेन पार्लियामेन्ट्री कमेटी व वैलफेयर एससीएसटी को दर्ज करवाई थी। इसमें सम्पूर्ण सर्व समाज के विभिन्न कार्यकर्ता और कई सामाजिक संगठनों का समर्थन हमारे साथ है। समरावता गांव में घटनास्थल का दौरा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग और मानवाधिकार आयोग का हो चुका है। आयोग ने प्रकरण की जांच करके इस वर्ष 2 अप्रैल को अपनी जांच रिपोर्ट राजस्थान सरकार और केन्द्र सरकार का सौंप दी थी। साथ ही एक महिने में पालना रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन दुख की बात है कि समरावता गांव के भोले-भाले आदिवासियों पर जिनमें वृद्धजन और बच्चियां शामिल है, संवेदनहीन रवैया अपनाया और ज्यादतियां करने वाले पुलिसकर्मी व प्रशासन के खिलाफ कोई कार्रवाई नई की गई। अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी केसी घुमरिया ने समरावता मामले में शीघ्र उचित कार्रवाई कर पीड़ितों को न्याय दिए जाने की मांग की है।
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