जिले में कहीं आमने-सामने ,तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
रिपोर्ट: विनोद विरोधी
गया, बिहार
सूबे में हो रहे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के चुनाव का शोर आज देर शाम थम गया है। जिले के 10 विधानसभा क्षेत्र में हो रहे चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।जिले के 10 विधानसभा क्षेत्र में कुल प्रत्याशी मैदान चुनाव मैदान में डटे हैं इनमें एनडीए गठबंधन एवं इंडिया गठबंधन समेत अन्य दलों के प्रत्याशी शामिल हैं। गया नगर विधानसभा क्षेत्र से आठ बार विधायक रह चुके व वर्तमान एनडीए सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रेम कुमार का मुकाबला इंडिया महागठबंधन में शामिल कांग्रेस प्रत्याशी मोहन श्रीवास्तव से आमने-सामने का मुकाबला है। वहीं भाजपा से ही पूर्व सांसद रह चुके धीरेंद्र अग्रवाल (चतरा लोकसभा क्षेत्र) जन सुराज पार्टी से प्रत्याशी बनकर मुकाबले को त्रिकोण बनाने के जुगत में लगे हैं। जिले के शेरघाटी विधानसभा सीट पर इस बार ने वर्तमान राजद विधायिका मंजू अग्रवाल का पत्ता साफ कर दिया गया है। यहां से राजद ने इसी वैश्य समुदाय से रहे प्रमोद कुमार वर्मा का टिकट दिया गया है ।इनका मुकाबला एनडीए से लोजपा प्रत्याशी उदय शंकर यादव का मुकाबला है।हालांकि इनके बाहरी उम्मीदवार होने से जीत संदेह के दायरे में है।वही इस लड़ाई को राजद के ही बागी उम्मीदवार रहे भगत यादव उर्फ सुरेंद्र सुमन ने अपनी दावेदारी ठोक दी है, जिससे मामला दिलचस्प हो गया है। हालांकि जन सुराज पार्टी के स्थानीय प्रत्याशी पवन किशोर ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर मामले को बहुकोणीय बनाने के फिराक में हैं। इस कांटे की लड़ाई में कौन बाजी मारेगी फिलहाल कहना मुश्किल लग रहा है? इधर बाराचट्टी (सु) विधानसभा क्षेत्र में भी निवर्तमान विधायिका रहे हम पार्टी के प्रत्याशी व केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की समधन ज्योति देवी को भी कड़ी चुनौती मिल रही है।इनका मुकाबला राजद प्रत्याशी तनुश्री मांझी से है। तनुश्री मांझी यहां के दिवंगत विधायिका व पत्थर तोड़ने वाली महिला के नाम से विख्यात भगवती देवी की नतिनी तथा पूर्व विधायिका समता देवी की बेटी है। दिवंगत भगवती देवी यहां से चार बार विधायक व एक बार गया (सुरक्षित)लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुकी है ।वहीं समता देवी दो बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। इस चुनाव को यहां भी जनसुराज पार्टी के इंजीनियर हेमंत पासवान त्रिकोण बनाने की जगत में लगे हैं। हालांकि इसमें कितना कामयाब होंगे यह तो समय बताएगा? जिले में कभी हॉट सीट माने जाने वाले इमामगंज (सुरक्षित)विधानसभा में इस बार की निवर्तमान विधायिका व एनडीए प्रत्याशी दीपा मांझी का मुकाबला राजद के रितु प्रिया चौधरी से आमने-सामने का भिड़ंत है। दीपा मांझी पिछले वर्ष संपन्न उपचुनाव में अपनी जीत दर्ज की थी। यह सीट हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के सांसद चुने जाने के बाद रिक्त हो गई थी।जिस पर उनके ही बहू दीपा मांझी ने अपनी जीत दर्ज की थी। यहां त्रिकोणीय मुकाबला था। राजद के रौशन मांझी यहां से चुनाव लड़े थे तथा जनसुराज से जितेंद्र पासवान भी सामने थे।इस बार स्थिति थोड़ी भिन्न है। राजद ने नए व युवा चेहरे को सामने लाया है और रितु प्रिया चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। रितु प्रिया चौधरी का संबंध यहां की बहुल मतदाता कुशवाहा समुदाय से है, जिन्होंने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं शोषित समाज दल समर्थित टेंगर पासवान ने भी अपनी दावेदारी जताई है और लड़ाई को त्रिकोण बनाने के लिए एड़ी चोटी एक किये हुए हैं। गुरुआ विधानसभा सीट पर इंडिया गठबंधन ने वर्तमान राजद विधायक विनय यादव पर दोबारा भरोसा जताया है। वहीं एनडीए में हम पार्टी से निकलकरभाजपा में आए पूर्व एमएलसी उपेंद्र प्रसाद दांगी पर भरोसा जताया है और इस चुनावी जंग में वे स्वच्छ छवि के माने जाते हैं। समाजवादी चरित्र के माने जाने वाले उपेंद्र दांगी एनडीए प्रत्याशी के रूप में कितना कामयाब होंगे यह सवर्ण व कुशवाहा मतों के दारोमदार पर निर्भर है। हालांकि यहां भी पूर्व एमएलसी संजीव श्याम सिंह जन सुराज पार्टी के टिकट पर चुनावी समीकरण को बिगड़ने में लगे हैं। वैसे यहां बदलाव की लहर में 'कमल' का फूल खिलेगा अथवा एक बार पुनः 'लालटेन' जलेगी देखना दिलचस्प होगा। जिला मुख्यालय से सटे व अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त स्थल बोधगया विधानसभा क्षेत्र फिलहाल राजद के कब्जे में है।यहां से निवर्तमान विधायक कुमार सर्वजीत हैं तथा राजद ने इन्हीं पर दोबारा भरोसा जताया है और चुनावी मैदान में उतारा है। इनके मुकाबले में एनडीए ने यहां के पूर्व विधायक व उनके ही बिरादरी के श्याम देव पासवान को चुनाव मैदान में उतारा है और इन्हीं दोनों के बीच कड़े मुकाबले के आसार हैं। इस कड़े मुकाबले में जीत किसकी होगी कहना मुश्किल है ?यहां के मतदाता निवर्तमान विधायक पर भरोसा कर पाते हैं अथवा बदलाव की वयार में किसी अन्य को जीत का सेहरा पहनाते हैं। जिले में हॉट सीट माने जाने वाले बेलागंज में भी इस बार कड़ा मुकाबला है। 1990 से लगातार विधायक रह चुके व मगध सम्राट के नाम से विख्यात डॉ सुरेंद्र यादव के पुत्र विश्वनाथ यादव राजद के प्रत्याशी हैं। डॉ सुरेंद्र यादव के पड़ोसी जिला जहानाबाद से सांसद चुने जाने के बाद यह सीट रिक्त हुई थी और यहां से जदयू की मनोरमा देवी चुनाव जीतकर सदन में पहुंची थी ।निवर्तमान विधायक मनोरमा देवी एक दबंग बाहुबली की विधवा है इस बार जदयू ने मनोरमा देवी पर पुनः भरोसा जताया है कांटे के इस मुकाबले में यहां के मतदाता पुनः मनोरमा देवी पर भरोसा जताते हैं अथवा एक बार पुनः लालटेन की लौ को जला पाते हैं। क्योंकि जिले के 10 विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री नीतीश की पार्टी जदयू को एकमात्र सीट यहां मिली है और यह सीट नीतीश कुमार के लिए भी प्रतिष्ठा का विषय बना हुआ है। इसी प्रकार टिकरी विधानसभा में न्यू वर्तमान विधायक एनडीए प्रत्याशी हम पार्टी के अनिल कुमार सिंह पुनः चुनाव मैदान में हैं वहीं इनका मुकाबला डॉक्टर अजय डांगी के साथ है वे राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार हैं। वर्तमान विधायक अनिल सिंह का क्षेत्र में के मतदाताओं के बीच असंतोष तो है, लेकिन बदलाव की इस बयार में वे पुनः इसी पर काबिज हो पाते हैं अथवा राजद प्रत्याशी डॉ.अजय दांगी लालटेन जला पाते हैं ।यह जातीय समीकरण के आधार पर टिकी है। यही स्थिति कमोबेश अतरी विधानसभा क्षेत्र की भी है जहां पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हम से रोमित कुमार चुनाव मैदान में एनडीए प्रत्याशी के रूप में डटे हैं वहीं राजद ने भी पूर्व विधायक राजेंद्र यादव की पुत्रवधू वैजयंती देवी के साथ है इस सीट पर 1990 से कमोब ऐश राजद का ही कब्जा रहा है सिर्फ एक बार जैदियों के यादव समुदाय से प्रत्याशी रहे डॉ कृष्ण नंदन यादव ने अपनी जीत दर्ज की थी। इस बार जीतन राम मांझी की पार्टी पहली बार यहां चुनाव मैदान में अपना उम्मीदवार खड़ा की है। हालांकि यहां कुशवाहा बिरादरी से आने वाले व शोषित समाज दल से प्रत्याशी के रूप में उम्मीदवार बनकर विद्याभूषण कुमार उर्फ सेनापति ने समीकरण को त्रिकोण बना दिया है। शोषित समाज दल बिहार के जाने-माने बिहार लेनिन के नाम से प्रसिद्ध अमर शहीद जगदेव प्रसाद की राजनीतिक दल है, जिसमें तमाम दलित पिछड़ों की भागीदारी मानी जाती रही है। यहां आगामी 11 नवंबर 2025 को चुनाव होना है और इस महासमर में कौन बाजी मारेगा और किसकी होगी हार, यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन यह दसों विधानसभा क्षेत्रों में कड़े मुकाबले है।
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