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ट्रैफिक पुलिस की महज चालान काटना ही ड्यूटी, जाम से मुक्ति दिलाना नहीं

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार

स्थानीय पुलिस प्रशासन की यातायात पुलिस ट्रैफिक पुलिस की कार्यवाही पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है, इसका मुख्य कारण यह है कि ट्रैफिक पुलिसअपना मूल ड्यूटी छोड़कर केवल वाहन चालकों से चालान काटने के फेर में पड़ी हुई है,इसके विपरीत शहर के व्यस्तम चौक चौराहा जैसे, मीना बाजार,लाल बाजार चौक,राजगुरु चौक, शोआ बाबू चौक,कचहरी चौक,समाहरणालय चौक,बस स्टैंड,रेलवे स्टेशन,तीन लालटेन चौक,क्रिश्चियन क्वार्ट,छावनी चौक चौराहा पर लगने वालेअप्रत्याशीस भीड़,जाम से मुक्ति दिलाने के लिए कोई ड्यूटी नहीं कर रही है,बल्कि केवल चालान काटकर राजस्व की वसूली करने की दिशा मेंअग्रसर है।शहर के क्षेत्र में जाम की ऐसी स्थिति बन जा रही है कि पैदल तो पैदल,वाहन का सरकना भी गंभीर समस्या बन गई है।वाहन चालक,टेंपो चालक,रिक्शा तांगा,कार,दो पहिया,तीन पहिया,चार पहिया वाहन काअपार भीड़ से निकलना टेढ़ी खीर बन गई है।पैदल चलने वाले राहगिरों को भी कम परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है, विद्यालय जाने के समय, छुट्टी के समय, कार्यालय जानेऔर छुट्टी के समय तो और भी जाम की समस्या रहती है,विद्यालय के छात्र,छात्राएं,कार्यालय कर्मी, आमआदमी इस जाम की समस्या से प्रतिदिन दोचार हो रहा है,मगर ट्रैफिक पुलिस प्रशासन एवं यातायात पुलिस मुकदर्शक बनी रहती है,उनके कानों पर जून तक नहीं रेंगती है,वह केवल चालान काटने, भारी वाहनों से सुविधा शुल्क वसूलने,फुटपाथ पर लगे दुकानदारों से पैसा कीअवैध वसूली करने में लगे रहते हैं।

जिला में पुलिस वालों के द्वारा वाहन चालकों से वसूली गई राशि जो करोड़ों में है,जिसका कोई लेखा-जोखा नहीं मिलता है,साथ ही यह राशि किस मदद में खर्च होती है,किसके आदेश से खर्च होती है,कहां खर्च होती है, इसका कोई लेखा-जोखा विभाग के द्वारा नहीं मिल पाता है,ऐसा क्यों? और नहीं ही इसका हिसाब, लेखा-जोखा को सार्वजनिक की जाती है,ऐसा क्यों? एक गंभीर,चिंताजनक विषय है, इस पर स्थानीय जिला पुलिस प्रशासन को ध्यान देना चाहिए

Karunakar Ram Tripathi
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