शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
स्थानीय नगर थाना क्षेत्र में अवस्थित बेतिया सरकारी मेडिकल कॉलेजअस्पताल इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है,रोगियों और उनके परिजनों के द्वारा रोगी की मृत्यु होने पर मारपीट,लड़ाई झगड़ा,गाली गलौज,तोड़फोड़ यह तो आम बात है,इसके अलावाअवैध वसूली,ड्यूटी पर तैनात गार्ड् के द्वारा रोगियों और उसके परिजनों के साथअभद्र व्यवहार, नाजायज वसूली,बाहर से दवा खरीदने के लिए प्रेरित करना आम बात बन गई है। इसके अलावा सबसे बड़ी बात यह सामनेआई है कि बिना पढ़ाई किए ही डॉक्टर बनने का सपना साकार हो रहा है। मेडिकल क्षेत्र के हर फैकल्टी में डॉक्टरों की काफी कमी है, इसके बावजूद भी मेडिकल कॉलेज के छात्रों को सभी विषय की पढ़ाई की जानकारी नहीं मिल रही है,बिना पढ़े ही डॉक्टर बनने का सपना को सजोए रहते हैं।वर्ष 2013 से 2019 तक मेडिकल पढ़ाई
करने वाले छात्रों का एक बैच पढ़ाई पूरी करके डॉक्टर बनकर निकल चुके हैं,मगर दूसरा बैच के मेडिकल पढ़ने वाले छात्रों के बीच विभिन्न विभागों में डॉक्टर की बहुत कमी है,छात्रों का पूरा कोर्स भी नहीं हो पा रहा है।इस कॉलेज मेंअभी 600 छात्र अध्यनरत है,इस मेडिकल कॉलेज में,नेत्रविभाग,एफएम टी,रेस्पिरेटरी टीबी विभाग, स्किन एंड वीडी,दंत रोग विभाग में कोई प्राध्यापक सहायक प्रोफेसर,प्रोफेसर
नहीं है। जीएमसीएच के प्राचार्य के दिनेश कुमार ने संवाददाता को बताया कि इस मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर की भारी कमी है,जिसको दूर करने के लिए मैं पटना में विभाग के लोगों के संपर्क में हूं,ताकिअतिशीघ्र ही इस मेडिकल कॉलेजअस्पताल में मेडिकल छात्र के पढ़ने के लिए हर विभाग में पूरी तौर पर मेडिकल के छात्रों को पढ़ाई में बाधा उत्पन्न नहीं हो,शिक्षकों की पूरी व्यवस्था हो जाए।इस मेडिकल कॉलेज में 21विभाग हैं,जिसके लिए 127 पद स्वीकृत है,मगर अभी 88 पद खाली पड़े हुए हैं,जिन पर नियुक्ति होना होगा
अभी इस मेडिकल कॉलेज में 39 प्रोफेसर कार्यरत हैं,बहुत विभाग में प्रोफेसर की कमी होने से बच्चों की पढ़ाई में काफी परेशानी हो रही है।
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