परतावल, महराजगंज, उत्तर प्रदेश
नगर पंचायत परतावल में ठंड से बचाव के लिए की जा रही व्यवस्थाओं की सच्चाई सामने आ गई है। अलाव के नाम पर कई स्थानों पर सिर्फ थोड़ी-सी राख और अधजली लकड़ियां डालकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। कागजों में जहां ठंड से राहत की पूरी तैयारी दर्शाई जा रही है, वहीं ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
कड़ाके की ठंड में गरीब, मजदूर और राहगीर ठिठुरने को मजबूर हैं। सार्वजनिक स्थलों, चौराहों और बाजारों में अलाव या तो जलाए ही नहीं जा रहे हैं या फिर नाममात्र के लिए लकड़ी डाल दी जाती है, जो कुछ ही देर में बुझ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ठंड से बचाव की व्यवस्था केवल फाइलों तक सीमित रह गई है।
वहीं दूसरी ओर, जिम्मेदारों पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। लोगों का कहना है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि रजाइयों में आराम फरमा रहे हैं, जबकि आम जनता ठंड में बेहाल है। इस स्थिति को लेकर नगरवासियों में रोष बढ़ता जा रहा है।
लोगों ने नगर पंचायत से मांग की है कि ठंड से बचाव के लिए वास्तविक और प्रभावी व्यवस्था की जाए, नियमित रूप से अलाव जलवाए जाएं और जरूरतमंदों को राहत पहुंचाई जाए। सवाल यह है कि क्या यही ठंड से राहत की व्यवस्था है, या फिर जिम्मेदारों की ओर से इसे भी सिर्फ औपचारिकता बनाकर छोड़ दिया गया है?
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