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मातृ दिवस पर गोरखपुर की युवा कवित्री एवं लेखिका डॉ.हिना कौसर गोरखपुरी की पुस्तक "वालिदैन : ख़ुदा का दूसरा रूप" उत्तराखंड से प्रकाशित हुई।

सेराज अहमद कुरैशी

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।

मातृ दिवस के शुभ अवसर पर गोरखपुर की युवा कवयित्री एवं लेखिका डॉ. हिना कौसर गोरखपुरी की पहली Anthology (एंथोलॉजी) साझा संकलन की पुस्तक "वालिदैन : ख़ुदा का दूसरा रूप" वैदिक प्रकाशन द्वारा उत्तराखंड से सफलता पूर्वक प्रकाशित हुई जिसमें पूरे भारत से 106 लेखक एवं लेखिकाओं ने अपनी रचनाओं के माध्यम से इस पुस्तक में सहभागिताएं दीं । इतना ही नहीं इस पुस्तक के लिए डॉ. हिना कौसर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त कवि एवं गीतकार प्रियांशु गजेंद्र ने हिना कौसर की पुस्तक के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं संदेश भेजी हैं और अपना आशीर्वाद दिया है। उनका यह शुभकामना संदेश भी इस पुस्तक में छपा है। इसके अलावा डॉ. हिना कौसर के बेहतरीन एवं सफल संपादन के लिए वैदिक प्रकाशन की फाउंडर प्रशस्ति सचदेव एवं प्रकाशन की पूरी टीम ने तारीफ़ करते हुए उन्हें बधाई, शुभकामनाएं और अपना ढेर सारा आशीर्वाद दिया। इस पुस्तक के प्रकाशित होने पर उनके माता पिता भाई बहन, रिश्तेदार, गोरखपुर के सभी लोगों ने एवं पूरे भारत से कवियों, लेखकों, साहित्यकारों ने शुभकामनाएं दी हैं। आपको बताते चलें डॉ. हिना कौसर गोरखपुरी उत्तर प्रदेश के शहर गोरखपुर की एक उभरती हुई वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर युवा कवयित्री, लेखिका, मंच संचालिका, साहित्यकार और समाज सेविका हैं। साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा अनेकों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुकी हैं । तकरीबन पुस्तकों में उनकी ग़ज़लें तथा कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अलावा विभिन्न पत्र पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में भी नियमित रूप से उनकी रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। डॉ. हिना कौसर ने अपनी इस पुस्तक में अपने वालिदैन /माँ बाप के प्यार, त्याग, बलिदान और उनके निः स्वार्थ प्रेम का विस्तार पूर्वक वर्णन किया है। मीडिया से बात करते हुए हिना कौसर ने बताया कि उनके माँ -बाप उनकी पूरी दुनिया हैं और 1 साल पहले उन्होंने एक ख्वाब देखा था कि वह अपने अम्मी अब्बू पर एक किताब लिखेंगी और आज मातृ दिवस पर उनका यह ख्वाब पूरा हो गया है। अपनी खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने ने कहा कि यह किताब आज मातृ दिवस पर मेरी तरफ से मेरे अम्मी अब्बू को एक छोटा सा तोहफ़ा है और उन्हें ही समर्पित है।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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