शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया,पश्चिमी चंपारण, बिहार।
स्थानीय नगर थाना क्षेत्र में अवस्थित बेतिया राज् के डायेवढी में प्रतिवर्ष लगने वाला फैंसी मेला की भूमि अपनेअस्तित्व को खो रही है, स्थानीय लोग फैंसी मेला में दुकान लगाने के लिए दूर दराज से आने वाले दुकानदार एवं स्थानीय दुकानदार लोग इसकी दूरदर्श पर आंसू बहा रहे हैं,जहां पर हर साल दुर्गा पूजा,दीपावली,छठ केअवसर पर फैंसी मेला का आयोजन किया जाता है,जहां पर इस जगह की दुर्दशा बद से बदतर हो गई है। हर साल इस ग्राउंड का विभाग द्वारा बंदोबस्ती कर ठेकेदार को ठीकेदारी दिया जाता है,जिससे लाखों लाख की राजस्व की प्राप्ति होती है। जहां पिछले साल 71लाख में मेला ग्राउंड का डाक किया गया था,हर साल की भांति इस साल भी इस मेला ग्राउंड का डाक होने वाला है,मगर मेला ग्राउंड का टेंडर करने वाले को थोड़ा भी फिक्र नहीं है कि इस ग्राउंड में जल जमाव,गड्ढा गुड्डी होने के कारण,ईट का ट्रेलर का भरमार लगा रहता है।ऐसी स्थिति में किस प्रकार मेला ग्राउंड में फंसी मेला का आयोजन हो सकता है। इस फैंसी मेला ग्राउंड का ठेका लेने वाले ठेकेदार मेला ग्राउंड का ऐसी दुर्दशा देखकर इसकी बंदोबसही करने,ठिका लेने से पीछे हट रहे हैं,बेतिया राज प्रबंधक को इससे राजस्व की वसूली होती है तो इस पर क्यों नहीं ध्यान दिया जाता है। आखिर जो पैसा सैरात बंदोबस्ती में आता है,आखिर वो राशि कहां जाता है,उस राशि से इस की मरम्मत, देखभाल,निर्माण, सौंदरजीकरण क्यों नहीं की जाती है। इस महंगाई के जमाने में 71 लाख का ठीका होना कोई छोटी रकम नहीं होती है,इस राशि का इस्तेमाल देखरेख,मरम्मती,निर्माण, सौंदरजीकरण,जल जमाव से छुटकारा के लिए राशि खर्च करनी चाहिए ताकि इस मेला ग्राउंड में लगने वाला फैंसी मेला में बाहर से आने वाले दुकानदार,स्थानीय दुकानदार, अपने अपने दुकानों को आसानी से लगा सके और आम जनता इस फैंसी मेला में अपने आवश्यकताअनुसार सामानों की खरीद बिक्री कर सके।इस सालआने वाला,दुर्गा पूजा,दीपावली,छट पर्व के अवसर पर लगने वाला फैंसी मेला में शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के पुरुष और महिलाओं को परेशानियों को झेलना नहीं पड़े।आखिर कौनऔर कैसे इस समस्या का समाधान होगा,यह अभी तक अबूझ पहेली बनी हुई है।
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