महिला सरपंच के बजाय पति करते हैं ग्राम कचहरी का संचालन करते हैं मनमाना फैसला।
रिपोर्ट: विनोद विरोधी
गया, बिहार।
महिला उत्थान के उद्देश्य से त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को 33 फीसदीआरक्षण दी गई है। जिससे पंचायत में बड़ी संख्या में महिलाएं प्रतिनिधि चुनकर आए हैं ।लेकिन विडम्बना है कि आज भी उनके हक अधिकारों का हनन कर संबंधित रिश्तेदार ही उन पदों पर काबिज रहते हैं ।ऐसे में उनके पति, ससुर, बेटे अथवा अन्य रिश्तेदारों का ही सिक्का चलता है ऐसे ही मामला सामने आया है जिले के डोभी प्रखंड अंतर्गत घोड़ाघाट पंचायत का ग्राम कचहरी इन दिनों विवादों को घेरे में आ गया है ।वर्तमान में इस पंचायत से सरपंच बसंती देवी है और दलित समुदाय से आती हैं। लेकिन उनका सारा कार्यभार उनके पति सिकंदर भुईया निभाते हैं। बताते हैं कि उनके मनमानी का तकाजा है कि वे पंचायत के मंजरी गांव के रहने वाले अशोक कुमार पिता गोविंद पासवान की अनुपस्थिति में बिना सूचना दिए उनके घर का बाउंड्री तोड़ दिया गया। उसके बाद बीते 19 अगस्त 2023 को नोटिस के माध्यम से बुलाया गया, लेकिन उसे दिन भी सिर्फ आगे की तारीख मुकर्रर कर छोड़ दिया गया। बताते हैं कि नाजायज पैसे लेकर फर्जी तरीके से फैसला सुनाया जाता है जिसे लोगों का पंचायत कचहरी से विश्वास उठता जा रहा है और कई राज खोल रहा है ।इस दौरान यह भी पता चला है कि उक्त ग्राम कचहरी का न्याय मित्र मुंबई में जाकर निजी नौकरी करते हैं। इस आशय की शिकायत पंचायती राज पदाधिकारी व स्थानीय बीडीओ से भी की गई है तथा सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस बाबत पूछे जाने पर सरपंच पति सिकंदर मांझी ने बताया कि मेरे ऊपर लगाए गए आरोप बेबुनियाद और निराधार है।
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