रिपोर्ट :विनोद विरोधी
गया, बिहार।
जिले के बाराचट्टी प्रखंड अंतर्गत पदुमचक गांव निवासी रामदेव मांझी के मरणोपरांत 'राम नाम सत्य है' के बजाय 'जीवन- मरण सत्य है' का जयकारा लगा अंतिम संस्कार किया गया। जिसमें कई स्थानीय लोगों ने भी शिरकत की। गौरतलब है कि लंबे अर्से से ब्रेन ट्यूमर के शिकार बने रामदेव मांझी (65 वर्षीय) की मौत मंगलवार को हो गया। इसके बाद उसके परिजनों ने मनुवादी व्यवस्था के तहत आडंबरों को नकरते हुए मानववादी तरीका अपनाकर अंतिम संस्कार स्थानीय बाराचट्टी के पदुमचक गांव में ही गोकुल नदी के तट पर किया गया। विदित यह भी हो कि मृतक रामदेव मांझी के दो बेटों देवानंद मांझी और देवेंद्र मांझी के अलावा तीन पुत्री में सुमित्रा देवी ,आरती कुमारी और सोनी कुमारी ने भी अर्थी को कंधा देकर शमशान घाट तक पहुंचाया। दिवंगत रामदेव मांझी के पुत्र देवानंद मांझी ने बताया कि मैं अपने दिवंगत पिता का अंतिम संस्कार व शोक श्रद्धांजलि कार्यक्रम मानववादी संगठन अर्जक संघ के नियमों के अनुकूल कर रहा हूं और करूंगा। वहीं इस मौके पर पहुंचे शोषित समाज दल के प्रांतीय उपाध्यक्ष व अर्जक नेता रामभजन मानव ने कहा कि आज पूरा समाज ब्राह्मणवादी आडंबरों में जकड़ा है। जहां की संस्कृति काफी विषमता मूलक है और समाज में श्रम करने वाले कौम नीच व लूट और ठगकर खाने वाला श्रेष्ठ बना है । इसके कारण व्यापक समाज शोषण के मकड़जाल में फंसा है ।ऐसी स्थिति में मृतक रामदेव मांझी के परिजनों द्वारा मनुवादी व्यवस्था को नकारने की पहल काफी सराहनीय है। उन्होंने बताया कि मानववादी संगठन अर्जक संघ द्वारा प्रतिपादित शोक श्रद्धांजलि व अंतिम संस्कार का कार्यक्रम कम खर्चीली है और हमें शोषण मुक्त समाज बनाने में सहयोग प्रदान करती है ।इस मौके पर मानववादी विचारक व अवकाश प्राप्त शिक्षक प्रसिद्ध सिंह के अलावा अर्जक संघ के जिला समिति सदस्य संजय मंडल, लालधारी मंडल समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे ।जिन्होंने ज्योतिबा फुले ,बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ,अमर शहीद जगदेव प्रसाद सरीखे महापुरुषों का स्मरण करते हुए दिवंगत रामदेव मांझी के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया तथा 'राम नाम झूठा है' और 'जीवन मरण सत्य है'का जयकारा लगाया ।जो इलाके में चर्चा का विषय बना है।
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