ब्यूरो चीफ अंजुम शहाब की रिपोर्ट ।मुज़फ्फरपुर बिहार।
महिला एवं बाल विकास निगम के सहयोग एवं आकांक्षा सेवा सदन और क्रिया एन.जी.ओ. के सौजन्य से संचालित इस कार्यक्रम का उप विकास आयुक्त महोदय ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। चाॅदंनी सिंह, डी.पी.ओ. आई.सी.डी.एस, जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, दिनेश कुमार, सविता अली, अधिवक्ता, पटना उच्च न्यायालय -सह- दलित वुमेन राईट्स एक्टिविस्ट की भी उपस्थिति रही। उप विकास आयुक्त महोदय ने अपने उदभोदन में कहा की सामाजिक सरोकार से जुरी यह कार्यशाला के दो पहलु है, संवेदनशीलता एवं इसका टेक्निकल पक्ष। जबतक व्यक्ति दोनों पक्षों में संतुलित नहीं रहेगा, तबतक इस कार्य के प्रति इमानदार नहीं हो सकता है, इसलिए हमे इसके कानूनी अधिनियम को अच्छी तरह से समझना होगा। साथ ही सामाजिक पहलू के साथ अधिक संवेदनशील होना होगा। यद्यपि समाज में महिलाओं के बीच अधिक स्वतंत्रता और नियम के प्रति सक्रियता बढ़ी है फिर भी कई मामले अभी भी यदा-कदा सामने आते है। अभी परिवर्तनकारी दौर है, इस परिवर्तनकारी दौर में सामाजिक स्वीकृति देर से मिलती है, जबकि नियम कानून का जागरूकता पहले आ जाती है। हम सभी को अपने दायित्व का बोध करना होगा। अब वो दिन दूर नहीं, जब महिलाओं को अधिनियम की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। डी.पी.ओ., आई.सी.डी.एस. श्रीमती चांदनी सिंह ने कार्यशाला की विषय-प्रवेश करायी। सविता अली, अधिवक्ता पटना उच्च न्यायालय सह दलित वुमेन राईट्स एक्टिविस्ट ने घरेलु हिंसा अधिनियम 2005 पाॅस्को ऐक्ट अधिनियम एवं सी.डी.पी. की भूमिका एवं जबावदेही पर विस्तार से जानकारी दी। ज्योति कुमारी, केन्द्र प्रशासक, वन स्टाॅप सेन्टर, मुजफ्फरपुर द्वारा खुला सेशन/प्रश्नोतर सत्र भी हुआ। बैठक में सभी सी.डी.पी.ओ. तथा अन्य एन.जी.ओ. के सदस्यगण उपस्थित थे।आकांक्षा सेवा सदन के सचिव वन्दना शर्मा सदस्य अलका सिन्हा सीमा,रेखा, नितु ,नगमा,अभय जी ,सोना कुमारी के द्वारा जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ,वन स्टाप सेंटर, महिला बिकास निगम, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी ,महिला थाना ,वकील उपस्थित थे
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