चहाररदीवारी के अभाव में असामाजिक तत्वों का वर्चस्व।
नागरिकों को महज ओपीडी की सुविधा प्राप्त।
रिपोर्ट: विनोद विरोधी
गया, बिहार।
जिले के बाराचट्टी प्रखंड अंतर्गत अवस्थित अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगंज इन दिनों अपनी बदहाली पर आठ- आठ आंसू बहा रहा है।सर्वप्रथम इस केंद्र का भवन इतना जर्जर है कि यहां मरीजों की इलाज तो दूर, बैठने तक के लिए मुश्किल है ।प्रखंड मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उक्त स्वास्थ्य केंद्र दो कमरों में संचालित है, लेकिन इन दोनों कमरों की हालत काफी जर्जर है। इस बरसात के मौसम में छतों से लगातार पानी टपकता रहता है ।वही जर्जर छतें कब गिर जाएगी मरीजों को यह आशंका लगातार सताते रहती है? वही इस अस्पताल परिसर में चहारदीवारी भी नहीं होने के कारण परिसर में लगे दो-दो चापाकल असमाजिक तत्वों के वजह से बेकार पड़े हैं। जिससे मरीजों व यहां तैनात चिकित्सकों समेत अन्य कर्मियों को बाहर से पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। इस सिलसिले में यहां तैनात चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रवि रंजन ने बताया कि इस संबंध में कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है। दो शैय्या वाले इस अस्पताल में महज ओपीडी की सुविधा ही प्राप्त है, जहां मात्र 50- 60 किस्म की दवाएं आम नागरिकों को उपलब्ध है। हालांकि यहां दो चिकित्सक समेत तीन अन्य कर्मी भी पदस्थापित है। लेकिन स्थानीय नागरिकों की शिकायत है कि वे नियमित समय पर मौजूद नहीं रह पाते हैं। जिसके कारण लोगों को निजी क्लिनिको का सहारा लेना पड़ता है। ग्रामीणों की यह भी शिकायत है कि 1995 के दशक में बने यह भवन कब धराशाई हो जाएगा और कितनों की जान ले लेगी फिलवक्त कहना मुश्किल है? बता दें कि इस अस्पताल में ऑक्सीजन समेत अन्य कई सुविधाएं उपलब्ध है लेकिन महज शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। इस संबंध में ना तो कोई स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान है और ना हीं कोई अधिकारियों का। जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
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