शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया,पश्चिमी चंपारण, बिहार।
इन दोनों नल जल योजना लूट खसोट काअड्डा बन गया है,साथ ही इस योजना को कामधेनु गाय कहा जाए तो बे बेजा नहीं होगा,यह योजना चाहे वह ग्रामीण नल जल योजना हो या शहरी नल जल योजना,दोनों योजना से आम जनता को लाभ तो कुछ भी नहीं,मगर घाटा बहुत ज्यादा हो रहा है। शहरी नल जल योजना से पूरे शहरी क्षेत्र के सड़क व गलियों की स्थिति अति दयनीय बन गई है।नए बने हुए पीसीसीकरण रोड, गलियों को उधेड़कर रख दिया गया है,जिससे लोगों के आवागमन में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।इसको बनाने में लगभग सप्ताह दिन लग जा रहा है,इसमें दो फीट कटे हुए रोड और गली को बनाने के लिए जो सामग्री इस्तेमाल की जा रही है,वह किसी हद तक सही नहीं है,उसमें सामग्री की मात्रा जिस अनुपात में लगना चाहिए नहीं लग रहा है,और ना ही काटे गए सड़क और गली को लेवलिंग करके प्लास्टर ही किया जा रहा है,बल्कि केवल किए गए गड्ढे को भर दिया जा रहा है,मसाला का अनुपात भी सही नहीं है, केवल खानापूर्ति कर दी जा रही है,ऐसा लगता है कि सप्ताह दिन के अंदर ही उखड़ जाएगी। इस योजना मे करोड़ों करोड़ों रुपए की घपला की जा रही है,इसमें संलग्न पदाधिकारी, बहुत सारे कर्मियों वअभिक्रताओं की चांदी कट रही है,मगर किए गए कार्यों की स्थल निरीक्षण करने वाला कोई पदाधिकारी नहीं है,केवल ठेकेदार,कर्मी,मजदूर पर छोड़ दिया गया है,साथ ही इनलोगों को इस तरह से समझा दिया गया है कि जितना कम से कम मटेरियल लगे उसी में कर देना है,इन लोगों को ऐसा गाइड किया गया है कि जैसे तैसे करके काम पूरा कर देना है, खोदे गए गड्ढे को सिर्फ भर देना है,काटे गए रोड,गली की दिशा देखने से यह स्पष्ट हो जाएगा कि केवल खानापूर्ति की गई है,बनाई नहीं गई है।बेतिया नगर निगम के महापौर उपमहापौर,नगरआयुक्त,नगर निगम पार्षद,अभिकर्ता को भी इतनी फुर्सत नहीं है कि जहां इस नल जल योजना का काम चल रहा है,वह किस स्थिति में बनाया जा रहा है।
इस शहरी नल जल योजना कार्य में बहुत सारी बेतुकी लापरवाहियों के बाद भी नल से जल नहीं निकल रहा है, जल के बदले कीचड़ युक्त पानी,बदबूदार नाली का पानी ही मिल रहा है। सरकार की यह नल जल योजना मात्र दिखावा है,लूट खसोट का अड्डा है।इसमें संलग्न सभी पदाधिकारीयों कर्मियों व अभिकर्ताओं,नगर निगम पार्षदों का पॉकेट गरम हो रहा है।कई स्थानीय लोगों ने संवाददाता को बताया कि इस नल जल योजना के काम में बड़ी लापरवाही है,इसमें लगने वाला सामान की गुणवत्ता भी सही नहीं है।स्थानीय कई लोगों ने पुरजोर शिकायत की है कि इसकी विधिवत जांच,जिला प्रशासन, नगर निगम प्रशासन बुडको से होनी चाहिए ताकि वास्तविकता सामने आ सके, जिससे की गई काम की गुणवत्ता पता चल सके।इसमें सुधार हो सके, अगर ऐसा नहीं किया गया तो खरबो खरब की यह नल जल योजना बेकार साबित हो जायेगी।
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