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एक बहुत बड़ी ग़लतफहमीयां, फिक्र ओ नतीजा - डॉ. मोहम्मद रिज़वान अहमद

भागलपुर, उत्तर प्रदेश।

"दुनिया की दशा और दिशा ये बड़े बड़े ओहदों पर बैठे हुए लोग, दौलतमंद लोग, महान बुद्धिमान समझे जाने वाले लोग तय करते हैं।"

 हक़ीक़त में ये सब बिचोलिये हैं इनकी हैसियत सिर्फ और सिर्फ सामान पहुंचाने वाले इंसान ( डिलीवरी बॉय )की है। इंसान जिस चीज़ की मांग करता है बनाने वाला वही चीज़ किसी बिचोलिये के हाथों उसे भेजता है। 

असल में आम इंसानों के अच्छे और बुरे काम है जो अल्लाह के पास मांग पत्र की शक्ल में जाते हैं और फिर अल्लाह उन्हें उसका जवाब देता है। अच्छे इंसान भेजकर, बुरे इंसान भेजकर, ज़मीनी ख़ज़ाने देकर, भुकंप और बाढ़ भेज कर, आसमान से बारिश बरसाकर, आसमान से बम बरसाकर। जैसा मांग वैसा सम्मान।

हम फिलिस्तीन के मुसलमानों के लिए क्या करें ??? 

हर मुम्किन मदद जो हमारे समझदार बड़े लोग हमसे करवाना चाहते हैं

और हम अपने हर काम पर ध्यान दें कि मेरा काम अल्लाह से क्या मांग रहा है और अल्लाह हमे इसके बदले क्या देने वाला है। 

काम(मांग)------ बदला(सामान) 

दिल से तौबा - आसमान से बारिश करवाती है।

गुनाहों पर जमे रहना- आसमान से आग बरसाती है।

अपने बच्चों के लिए अल्लाह के सामने रोना- ज़मीनी ख़ज़ाने

अपनी नस्लों से बेफिक्र रहना।

 ज़िना करना-ज़मीनी ज़लज़ला का आना।

हलाल खाना- ज़ेहनी और जिस्मानी ताक़त का आना।

हराम खाना- ज़ेहनी और जिस्मानी कमज़ोरी का आना।

हलाल आमदनी- वफ़ादार रिश्तेदार (औलाद....) का होना।

हराम आमदनी- ना फरमान रिश्तेदार( औलाद...) का होना।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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