'जस्टिस डिलिवरी टू जेन. अल्फा' विषयक संगोष्ठी में बोले सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति
सलमान अहमद
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्थल ने कहा कि संचार क्रांति के दौर में नई पीढ़ी को पकड़ने वजकड़ने की नहीं बल्कि उन्हें और उनकी भावनाओं को समझने की जरूरत है। यह एक बड़ी चुनौती है। इसका कारण है कि इंटरनेट के जाल में फंस चुकी पीढ़ी सामाजिक और व्यावहारिक जीवन से लगातार दूर हो रही है। उनके बौद्धिक विकास के साथ ही शारीरिक विकास पर जोर देने की जरूरतहै।
न्यायमूर्ति मित्थल यूनिसेफ और लीगल असिस्टेंस फोरम के तत्वावधान में केपी कम्यूनिटी सेंटर में संयुक्त रूप से आयोजित "जस्टिस डिलीवरी टू जेन अल्फा विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। बाल संरक्षण संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा पीढ़ी त्वरित न्याय की मांग कर रही है। आज की पीढ़ी न्यायिक प्रक्रिया में तारीख पे तारीख वाली कार्य संस्कृति बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। नाबालिग के विधिक संरक्षक का चुनाव करते समय हमें माता-पिता की पदीय हैसियत पर विचार करने के बजाय इस बात पर विचार करना चाहिए कि कौन बच्चे के मन को पढ़ सकता है। इसी कड़ी में विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने कहा कि जेन अल्फा को समझना कठिन है। सोशल मीडिया में उलझी पीढ़ी मानवीय और पारिवारिक रिश्तों से दूर हो रही है। जो चिंता का विषय है। यूनीसेफ के बाल संरक्षक विशेषज्ञ सोनीकुट्टी जार्ज ने कहा कि जेनअल्फा (2010-2024 के बीच जन्मे लोग) के संरक्षण पर बात करने के साथ ही उनकी उभरती जरूरतों और उनकी संभावनाओं पर समझ बनाने की जरूरत है।
जब तक हमें उनकी भावनाओं समझ नहीं होगी तब तक हम उनके संरक्षण के लिए न उपयोगी कानून बना सकते हैं और न उन्हें करवा सकते हैं। कार्यक्रम संयोजन सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता व लीगल असिस्टेंस फोरम कार्यवाहक अध्यक्ष अनुपम के मिश्रा ने किया। लीगल असिस्टेंस फोरम के अध्यक्ष केएस भाटी ने अतिथियों का स्वागत किया। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राजेश पचौरी ने कहा कि बच्चों के समुचित विकास को अनेक अवसर हैं चुनौतियां का आपसी सामंजस्य से समाधान करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला, न्यायमूर्ति अरविंद सांगवान, न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी, न्यायमूर्ति अनीस गुप्ता, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, पूर्व अध्यक्ष आरके ओझा, अनुज कुमार सिंह, सूरज पाडेय, धर्मेन्द्र केसरवानी, सोमनाथ भट्टाचार्य, सीरिश चंद्र सक्सेना, आशुतोष मिश्रा, सांगलू भूपेन्द्र विश्वकर्मा, प्रियंका शर्मा, रामेश्वर धर द्विवेदी, आराध्य आदि मौजूद रहे।
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