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मनुष्य कर्म से महान होता है जाति से नहीं सरपंच रामगोपाल समुद्रे।

हफ़ीज अहमद खान

कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश।

बाल्मीकि समाज के द्वितीय आदि गुरू महर्षि सुपच सुदर्शन जी का जन्मोत्सव सुदर्शन धर्मशाले में बड़े धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने महर्षि सुदर्शन जी की चित्र की आरती उतार कर पूजा अर्चना भी की थी। इस मौके पर आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि महर्षि जी के बताये रास्ते का अनुशरण करने मात्र से व्यक्ति की आधी समस्यायें कम हो सकती है। सरपंच राम गोपाल समुद्रे ने कहा कि महर्षि सुदर्शन द्वापर युग के महान संतों में से एक थे जिन्होनें भीम जैसे बलसाली योद्धा को शिक्षा दी थी कि मनुष्य कर्म से महान होता है। राजा व बलिशाली होने से नहीं चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो, पाण्डों का यज्ञ सुदर्शन के पहुंचने भोजन करने पर ही सफल हुआ। समति के उपाध्यक्ष मुन्ना पहलवान ने कहा कि समाज के उत्थान के लिए सभी संगठनों को एक मंच में आना चाहिए तभी समाज की समस्याओं का समाधान हो सकता है। महंत जी ने संतो के बताये रास्ते का अनुशरण करने हेतु उपस्थित जन समुदाय को शपथ दिलवायी।इस मौके पर प्रमुख रूप से मुन्ना पहलवान, राम स्वरुप, कमल टण्डन, अरूण समुद्रे, बब्लू खोटे, हरभजन ननहेट, विनोद कुमार एड०, सुशील शेरवां, सनी बाल्मीकि, मान सिंह, माता प्रसाद, सुरेश भारती, मुन्ना हजारिया, राम गोपाल सागर, डी०डी० सुमन, बृजेन्द्र मकोरिया, शिवराम मकोरिया, सुनील हजारिया, सोनू बाल्मीकि आदि ने भी अपने विचार रखे।

 उपस्थित श्रद्धालुओं ने गुरू का भण्डारा ग्रहण किया। कार्यक्रम का संचालन बबलू खोटे एवं अध्यक्षता प्रकाश हजारिया ने की।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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