शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया,पश्चिमी चंपारण, बिहार।
सरकारी कर्मी,डॉक्टर, प्रोफेसर,टीचर के अलावा अन्य सरकारी कर्मी जो अपनी सेवा मेंआता है तो 35 वर्षों या उससे अधिक की सेवा करने के पश्चात उसको सेवानिवृत्ति होना ही है, यह सरकारी कर्मियों की एक निश्चित समय अवधि के अंदर समझी प्रांत सेवानिवृत्ति उपरांत काम करने से मुक्ति मिल जाती है इसके साथ ही वह अपने आप को टेंशन फ्री समझने लगता है इतना ही नहीं सेवानिवृत्ति उपरांत मिलने वाली उसकी कटौती की राशि से आने वाले दिनों के लिएअपना एक कार्यक्रम तैयार करता है, जिससे आने वाली जिंदगी आराम से कट सके।35 वर्षों की सरकारी सेवा बेदाग सेवानिवृत्ति होना बहुत ही गर्भ की बात है ! उक्त बातें डॉ दिनेश कुमार,प्राचार्य,राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय ने डॉ गोविंदाआचार्या जीएमसीएच के सेवानिवृत्ति पर महाविद्यालय परिसर में आयोजित विदाई सह सम्मान समारोह के दौरान,मौके पर उपस्थित चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कही ।
वही डॉ वीरेंद्र कुमार, विभागाध्यक्ष फिजियोथैरेपी ने संबोधन के दौरान कहा कि जब राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय की शुरुआत हुई तब से महाविद्यालय सह अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ पदस्थापना हुई,तब मरीजों की संख्या 20 से 25 थी,डॉ आचार्या के आने के बाद 200 से 250 चर्म रोगी की संख्या बढ़ गई,जिसमें इनका सराहनीय योगदान रहा।वैसे तो देखा जाए तो चिकित्सक कभी सेवानिवृत्ति नहीं होता,वह सदा समाज सेवा मे लगा ही रहता है।।इस मौके पर,डॉ सुधा भारती,अधीक्षक जीएमसी एच अस्पताल,डॉ राजेश कुमार,डॉ देवैकांत मिश्र, उपाधीक्षक,विभागाध्यक्ष डॉ सलील शर्मा,(नाक,गला) , डॉ राजकुमार दीपक,डॉ मालविका,डॉ राजीव कुमार, डॉ सुधीर कुमार,डॉ सुमित कुमार,डॉ राजकुमार दीपक, डॉ राजीव कुमार रजक,डॉ अविनाश सिंह,डॉ मुग्धा,डॉ सुमित,डॉ सत्येंद्र गुप्ता,डॉ शिव शंकर कुमार,डॉ प्रेम कुमार,डॉ अजय कुमार ,इंटर्न स्टूडेंट्स, कर्मीआदि मौजूद रहे।
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