शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया,पश्चिमी चंपारण, बिहार।
स्थानीय नगर थाना क्षेत्र में अवस्थित,बेतिया एमजेके अस्पताल के पुराने भवन में खुला नशा मुक्ति केंद्र अब बंदी के कगार पर पहुंच गया है, यहां एक भी नशा करने वाले रोगी का आना-जाना नहीं है। शराबबंदी के मामले को लेकर शराब पीने,बेचने,बनाने वालों पर पाबंदी लगी हुई थी, जिसके कारण नशा करने वाले लोगों के लिए उनकी जांच करने,शराब का लत छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र बनाया गया था,जहां नशा में लिप्त नशाखोरों का इलाज किया जाता था,मगर स्थानीय अस्पताल प्रशासन की सारी लापरवाही के चलते अब बंद होने के कगार पर पहुंच गया है
नशा करने शराब पीने वाले लोगों का इलाज अब जीएमसी में ही मशीन के द्वारा कर दिया जा रहा है, पुराना भवन को तोड़कर नया भवन निर्माण के क्रम में इसे तत्काल तौर पर बंद कर दिया गया है भवन निर्माण होने के उपरांत पुणे इस नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना कर दी जाएगी, मगर तात्कालिक तौर पर यह बंद ही हो गया है। इस बात की जानकारी संवाददाता को सिविल सर्जन बेतिया डॉक्टर श्रीकांत दुबे ने दी है। नशा मुक्ति केंद्र खुलने के समय से अब तक को 23 लोगों का इलाज किया जा चुका है।
जिले के लिए 2800 नशेड़ियों की पहचान की गई थी,जिन में 225 महिलाएं थी। नशा मुक्ति केंद्र में नशेड़ियों के इलाज करने के लिए आधुनिक को उपकरण लगाए गए थे जो जीएमसी में आने के बाद उन सभी उपकरणों का कोई आता पता नहीं है।
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