भूख हड़ताल तो झांकी है अभी लड़ाई बाकी है-शक्तिधर
हमारी मांगो पर विचार नहीं किया तो करेंगे चक्काजाम
डॉ शशि कांत सुमन
मुंगेर, बिहार।
मंगलवार को पूर्व रेलवे जमालपुर कारखाने के तीन नंबर गेट के समीप ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन जमालपुर कारखाना शाखा के द्वारा शाखा अध्यक्ष कामरेड दीपक कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एआईआरएफ एवं ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन के आवाहन पर नई पेंशन स्कीम के खिलाफ एवं पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली के लिए दो दिवसीय भूख हड़ताल के दूसरे दिन भूख हड़ताल कर कर्मचारी ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। इस भूख हड़ताल में उपस्थित रेलकर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में इंकलाब जिंदाबाद , ईआरएमयू जिंदाबाद, एआईआरएफ जिंदाबाद, नई पेंशन नीति को रद्द करो,पुरानी पेंशन लागू करो,इत्यादि नारो से गुंजायमान कर रहे थे।भूख हड़ताल के मुख्य अतिथि एआईआरएफ के वर्किंग कमेटी सदस्य वीरेंद्र प्रसाद यादव एवं ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन के केंद्रीय उपाध्यक्ष कामरेड राजेंद्र प्रसाद यादव जी,केंद्रीय परिषद सदस्य ओमप्रकाश साव जी उपस्थित रहे l इस अवसर पर शाखा सचिव कॉम अनिल प्रसाद यादव ने बताया कि जेएफआरपीएस एवं एआईआरएफ के आवाहन पर राष्ट्रीय स्तर पर नई पेंशन स्कीम के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल का आयोजन किया जा रहा है l उन्होंने बताया कि नई पेंशन स्कीम बाजार पर आधारित है, इसमें एक निश्चित पेंशन नहीं है। पारिवारिक पेंशन भी नहीं मिलती है, इस पेंशन पर महंगाई भत्ता भी लागू नहीं होता है, अगर नई पेंशन नीति के अंदर का कर्मी वीआरएस लेता है तो उसे कुल जमा राशि का केवल 20% राशि ही मिल पाती है। अगर पति एवं पत्नी नई पेंशन नीति लेती है तो एक लाख निवेश पर 524 मात्र पेंशन मिलेगा अगर सिर्फ कर्मी पेंशन लेता है तो एक लाख के निवेश पर 713 रुपए मात्र प्रति माह पेंशन मिलेगा।
पूर्व नेता शक्तिधर प्रसाद जी ने कहा कि 8 से 11 जनवरी 2024 तक भूख हड़ताल का आयोजन करने का निर्णय लिया गया है l ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन कोलकाता के द्वारा यह निर्णय लिया गया की 8 एवं 9 जनवरी 2024 को ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन के स्थानीय इकाई द्वारा स्थानीय स्तर पर भूख हड़ताल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के अर्थशास्त्री कहते हैं अगर पुरानी पेंशन लागू किया जाए तो देश की अर्थव्यवस्था दयनीय हो जाएगी। 46 लाख करोड़ रूपया बैंक कर्ज को बट्टे खाते में डाल दिया गया 2014 में कॉरपोरेट टैक्स 30% था जिसे कम कर 22% कर दिया गया और लाखों करोड़ों की राहत दी गई। इस पर अर्थशास्त्री क्यों मौन है, बैंकों से लगभग 70000 करोड रुपए कर्ज लेकर पूंजीपति वर्ग विदेश में भाग गया। लेकिन उसकी कोई चर्चा नहीं होती है। लेकिन जब बात कर्मचारियों की पेंशन की आती है, तो देश की अर्थव्यवस्था खराब होने की बात कही जाती है जो न्यायपूर्ण नहीं है।
इस भूख हड़ताल को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए अजय ज, युवा कन्वेनर गोपाल , युवा सचिव रणजीत कुमार सिंह, युवा अध्यक्ष अभिमन्यु कुमार, सहित संजीव, अभिषेक, पंकज, सुब्रत गौतम, प्रवीण, धर्मेंद्र,संजय, सुनील , आलम मंडोलन जैसे कई युवाओं ने सभा को संबोधित किया । वक्ताओं ने कहा कि अभी संगठन के आवाहन पर हड़ताल के रिहर्सल एवं कर्मचारियों को जागरूक करने के लिए शाखा के निर्वाचित एवं सक्रिय सदस्य भूख हड़ताल पर बैठे है l यदि इसके बाद भी सरकार नहीं मानी तो संगठन यदि आवाहन करता है तो हमलोग कर्मचारियों के साथ भूख हड़ताल कर चक्का जाम करने के लिए विवश होंगे। सबों ने संयुक्त रूप से सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अभी तो यह झांकी है, लड़ाई होना बाकी है। सरकार वक्त रहते कर्मचारियों के भावनाओं को समझ पुनः पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू कर दे वरना भविष्य में होने वाले सारे आंदोलन के जिम्मेवारी सरकार की होगी l उन लोगों ने कहा की सांसद विधायक जितनी बार चुनाव जीतते हैं उसे उतनी बार पुरानी पेंशन मिलती है, एक लोकसभा सदस्य विधायक चार-चार पेंशन ले रहे हैं। लेकिन युवा कर्मियों को पेंशन देने में उन्हें काफी मुश्किल हो रही है। दूसरे दिन के भूख हड़ताल पर मुख्य रूप से संजय कुमार ओझा,परमानंद कुमार, मो0 वहाबुद्दीन,संतोष कुमार, शिशिर कुमार,मृत्युंजय कुमार सिंह,गणेश कुमार,रणधीर कुमार,देवानंद सागर,शैलेंद्र कुमार,धीरज,अजय,शमीम, मो0 रिजवान आलम,चंदन कुमार,रवि कुमार, नीरज कुमार, संजय, पवन,रविशंकर, रवि, रामपुकार,सिकंदर सोरेन,संतोष,संजय शर्मा,महिला सचिव नूतन देवी,महिला अध्यक्ष मंजू श्रीवास्तव,महिला संयुक्त सचिव मधु देवी के अलावा पूनम,प्रीति,सुजाता सहित सैकड़ों युवा एवम महिला कर्मचारियों साथी ने इस भूख हड़ताल में हिस्सा लिया।
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