*शीर्षक : "मेरी माँ"*
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
*"आप सब की दुआ मुझको अब भा गई*
*ये बुलंदी मिली हर जगह छा गई*
*ठोकरें खा के मंज़िल मिली है "हिना"*
*मेरी माँ की दुआ मेरे काम आ गई "*
माँ के लिए क्या लिखूं....✍️
माँ ने तो ख़ुद मुझे लिखा है। माँ एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही रोम रोम खिल उठता है और ममता का एक अलग ही एहसास कराता है। माँ से कोई छोटा शब्द हो तो बताओ लेकिन माँ से बड़ा भी कोई शब्द हो तो बताओ.....माँ जिसके क़दमों में तो ख़ुदा ने पूरी जन्नत रख दी। माँ बच्चे के मुँह से निकलने वाला पहला शब्द, ख़ुशी हो या ग़म में सबसे पहले याद आने वाली जो हस्ती है वो मेरी माँ ही तो है।
माँ की तरह कोई ख्याल रखे ये सिर्फ ख्याल ही हो सकता है हक़ीक़त नहीं।
माँ जिसने मुझे जीवन दिया और इस खूबसूरत सी दुनिया में ज़िन्दगी जीने का शुभ अवसर दिया और न केवल अवसर दिया बल्कि ये भी बताया कि इस दुनिया में ख़ुद को कैसे परिचित कराना है ख़ुद के अच्छे और स्नेह पूर्ण आचरण व व्यवहार से। मेरी माँ जो मेरी पहली रक्षक, पहली शिक्षक और सबसे पहली और सबसे अच्छी दोस्त है। माँ जो ख़ुद को भूल कर बच्चों के लिए जीना जानती है। माँ के इसी प्यार और समर्पण को याद करते हुए *"मातृ दिवस"* पर मेरी माँ के लिए मेरी भावनाएं। माँ जिनको मैं अम्मी कहती हुँ जिन्होंने हमेशा से तीन बातें सिखाई मुझे.....पहली बेटी कभी झूठ नहीं बोलना हमेशा सच के साथ रहना दूसरी कोशिश करना कभी कोई गलती न हो फिर भी अगर कभी कोई गलती से भी गलती हो जाये तो सबसे पहले हमें बताना और तीसरी कभी किसी के साथ गलत नहीं करना, किसी का दिल नहीं दुखाना। इसलिए मुझे लगता है मेरी अम्मी मेरी सबसे अच्छी और ख़ास हैं क्योंकि वो हमेशा हर पल हर सुख दुख में मेरे साथ खड़ी रही हैं न सिर्फ माँ की तरह बल्कि एक अच्छी दोस्त की तरह भी और हमेशा समझाती रहती हैं क्या सही है क्या ग़लत है जिससे मुझे सही ग़लत की समझ हो सके और मैं ग़लत रास्ते पर चलने से बच सकूँ । माँ के लिए जितना भी लिखूं कम ही होगा । इसलिए इतना ही कहूँगी कि ख़ुदा हमारी अम्मी को अच्छी सेहत दे लम्बी उम्र दे और उनका साया और साथ हम भाई बहनों पर सदा यूँ ही बना रहे और उनकी रहनुमाई हमें हमेशा यूँ ही मिलती रहे।
अंत में अगर माँ के लिए शेर लिखूं तो क्या लिखूं .....??✍️क्योंकि उन्होंने तो ख़ुद मुझे शेर बनाया है क्योंकि एक जो सबसे बड़ी बात हमेशा मेरी अम्मी मुझसे कहती हैं बेटा कभी किसी से बेवजह लड़ना नहीं लेकिन अगर लड़ना पड़े तो फिर कभी किसी से डरना नहीं। अम्मी ने मुझे अगर सभी के साथ प्रेम व सद्भाव से रहने की सीख दी तो साथ में अपने साथ होने वाले अन्याय या ग़लत के खिलाफ आवाज़ उठाने की हिम्मत भी दी है।अपनी माँ के लिए जितना भी लिखूं कम ही होगा। इसलिए मुझे लगता है मेरी अम्मी सबसे अच्छी, प्यारी और मेरे लिए सबसे ख़ास हैं और आज मैं जो भी हुँ उन्हीं की बदौलत हुँ ।
*"मांग लूं यह मन्नत की,फिर यही "जहाँ" मिले,*
*फिर यही गोद,फिर यही "माँ" मिले ।"*
हिना कौसर गोरखपुरी
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