शर्मिला घोष ने मुकदमा दर्ज करवाने के लिए लड़ी लंबी लड़ाई न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा।
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
हिंदी बाजार के एक बड़े सराफा व्यापारी और परिवार के सदस्यों पर फर्जी बैनामा कराने का आरोप लगा है। पीड़ित का आरोप है कि फर्जी व्यक्ति को खड़ा कर जमीन और मकान का बैनामा करा लिया गया। फर्जी बैनामे की जांच भी गोपनीय तरीके से जिले के एक पुलिस अधिकारी की तरफ से की गई थी, लेकिन इस रिपोर्ट को पुलिस ने दरकिनार कर दिया। तब पीड़ित ने सभी प्रपत्रों के साथ न्यायालय की शरण ली। प्रार्थनापत्र की सुनवाई करते हुए एसीजेएम ज्ञानेंद्र कुमार द्वितीय ने कोतवाली थाने को एक सप्ताह के भीतर केस दर्ज कर न्यायालय को सूचना देने का आदेश जारी किया है। न्यायालय के आदेश के बाद कोतवाली पुलिस ने रमन कुमार पुत्र कृष्ण बिहारी लाल, नीरज कुमार पुत्र स्वर्गीय सुरेश कुमार, रोहित कुमार पुत्र रमन कुमार और 10 से 12 व्यक्ति अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। कोतवाली इलाके के पुर्दिलपुर की रहने वाली शर्मिला घोष ने बताया कि उनके बाबा खगेंद्र नाथ घोष ने 1938 में घर बनवाया था। पूर्वजों की मौत के बाद शर्मिला घोष का नाम भवन पर दर्ज चला आ रहा है। शर्मिला घोष का आरोप है कि उनके 1402 वर्ग फीट मकान और 5000 वर्ग फीट खाली जमीन को हड़पने के लिए सराफा परिवार ने फर्जी व्यक्ति खड़ा कर 31 मई 1996 में कूटरचित रजिस्ट्री बैनामा करवा लिया फर्जी बैनामा के आधार पर पुश्तैनी मकान पर मिलीभगत कर नगर निगम में अपना नाम भी दर्ज करवा लिया। अवैध रूप से कागजों में नाम चढ़वाने के बाद आरोपियों की तरफ से आए दिन विधिविरुद्ध तरीके से बेदखल कर पीड़िता के भवन व जमीन पर कब्जा करने की धमकी दी जाती थी। न्यायालय में दिए प्रार्थनापत्र के माध्यम से पीड़ित ने बताया कि इस मामले में उनकी तरफ से 15 दिसंबर 2022 को एसएसपी को आईजीआरएस कर शिकायत की गई थी। इसी आधार पर क्षेत्राधिकारी कैंट को मामले की जांच सौंपी गई थी। प्रपत्रों की जांच कर सहायक निरीक्षक निबंधन से पत्राचार कर जमीन के संबंध में आख्या मांगी थी। इस जांच में भी साफ हो गया था कि संबंधित जमीन, जिसका बैनामा किया गया था, वह विधिक रूप से सही नहीं है। इस रिपोर्ट के बाद भी आरोपियों पर केस पंजीकृत नहीं हो सका। शर्मिला घोष ने बताया कि तमाम जांच में ये साबित हो गया था कि आरोपियों ने फर्जी और कूटरचित तरीके से राजेस्ट्री और बैनामा करवा लिया था उसके बाद भी न जाने क्यों पुलिस मुकदमा दर्ज नही कर रही थी मजबूर होकर मुझे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी और मुझे न्यायालय से इंसाफ मिल गया सभी आरोपियों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
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