संतकबीर नगर, उत्तर प्रदेश।
यूपी के सन्त कबीर नगर सूत्र सीएचसी अधीक्षक के रहम करम से चल रहा धड़ल्ले से मेडिकल स्टोर्स,पैथलोजी का संचालन हो रहा है इन प्रतिष्ठानों के संचालक सीधे-सीधे आम जनमानस की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं दवाइयों के आड़ में नशीले पदार्थों की बिक्री भी की जा रही है।
यदि आप सन्त कबीर नगर लोहरसन में रहते है तो आपको अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है, लोहरसन में इस समय एक दर्जन से अधिक फर्जी मेडिकल स्टोर धडल्ले से चल रहे है। इस समस्या से जूझ रहे कुछ लोगो ने अपना व्यापार बदलने का फैसला कर लिया। इस बदलाव की दौड़ में एक चौकाने वाला आकड़ा सामने आया है एक्सपर्ट की माने तो अधिकांश लोगों ने इमरजेंसी सेवाओ में जाने का निर्णय लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि यह इसलिए हुआ क्योंकि जब कोरोना काल में सभी के दुकानों के शटर बंद हो गए थे एक यही व्यापार ऐसा था जो 12 घंटे दिन खुला रहा और तेजी से आगे बढ़ रहा था। लेकिन कुछ लोगो ने इस आपदा में अवसर तलाशने का प्रयास किया था। कोरोना काल खत्म होने के साथ साथ जब व्यापार शून्य हो गए तो बड़ी संख्या में लोगो ने अपने व्यापार को बदल लिया जिसमे अधिकांश लोगों ने मैडिकल लाइन को चुना।
लोगो ने टीबी और अन्य दवाओं डाक्टर व फार्मासिस्ट मेडिकल स्टोर से लिख रहे सूत्रों से पता चला कि लोगों मेडिकल स्टोर के लोग सरकारी हास्पिटल अपना पैढ बना लिए , चाहें डिलेवरी का मामला , चाहें किसी बिमारियों का सभी दवा बहार से लिखा जा रहा सूत्र से पता चला है वहां सरकारी हास्पिटल में स्टार नर्स,ETC के लोग और कुछ डाक्टर , और फार्मासिस्ट काई वर्ष लगभग 6-8 वर्ष से तैनात अपना पांव अंगद की तरह जाम लिए अभी तक इनका ट्रांसफर नहीं हुआ जो सरकार ने लाख दावे कर रही भ्रष्टाचार रोकने को नियमों धज्जियां उड़ाई जा रही वहीं लोहरसन सरकारी हास्पिटल का है लेकिन शुरुवात कर धीरे धीरे मैडिकल स्टोर व अस्पतालो में परिवर्तित कर दिया जो बिना किसी की अनुमति व अनुभव के आज भी संचालित हो रहे है जो अब एक बड़ा खतरा बनकर उभर रहे है। सूत्रों से पता चला खुन जांच की मशीन सरकारी हास्पिटल उपलब्ध रहाने के टीवी के मरीजों जांच बहार लैब से कराया जा रहा है
सूत्रों से पता चला है सीएचसी अधीक्षक के संरक्षण में यह भ्रष्टाचार और फर्जी मेडिकल स्टोर संचालित हो रही है।
इस व्यापार की रात दिन होती तरक्की देख कुछ ऐसे लोग इस लाइन में तेजी से घुस रहे है जिनका इस लाइन में न कोई पुराना अनुभव रहा है और न ही इनके पास कोई डिग्री है। जो लोग कभी कबाड़ी का काम करते थे ट्रैक्टर के मिस्त्री थे, ड्राइवर थे या अन्य ऐसे किसी काम में लगे थे जिसमे मैडिकल लाइन का कोई अनुभव नहीं था ऐसे लोगो ने मैडिकल स्टोर, जिसमे से अधिकांश लोगो ने संबंधित विभाग से परमिशन या NOC लेना भी जरूरी नहीं समझा।
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