सीतापुर, उत्तर प्रदेश।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत सोमवार नौ सितंबर को दस दिवसीय सक्रिय क्षय रोगी खोज (एसीएफ) अभियान का शुभारंभ किया गया। इस मौके पर सीएमओ डॉ. हरपाल सिंह ने इस अभियान में लगी टीमों को हरी झंडी दिखाकर जिला क्षय रोग केंद्र से रवाना किया। अभियान से जुड़ी टीमों के सदस्यों को किट भी वितरित की गईं। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर संभावित क्षय रोग के लक्षण वाले मरीजों की पहचान करेंगी। जिसके बाद चिन्हित इन संभावित रोगियों की टीबी की जांच की जाएगी और टीबी की पुष्टि होने पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनका इलाज शुरू किया जाएगा।
इस मौके पर सीएमओ डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि यह अभियान आगामी 20 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान अनाथालय, वृद्धाश्रम, नारी निकेतन, ईंट-भट्टे, निर्माणाधीन प्रोजेक्ट, फल व सब्जी मंडी, क्रेशर, बाल संरक्षण गृह, लेबर मार्केट आदि में संभावित टीबी रोगियों की खोज की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले की कुल आबादी की 20 फीसद आबादी को आच्छादित करते हुए शहरी एवं ग्रामीण बस्ती तथा हाई रिस्क क्षेत्र में यह अभियान चलेगा।
कैसे होता है टीबी सीएमओ ने बताया कि टीबी (क्षय रोग) माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होता है। टीबी (क्षय रोग) का बैक्टीरिया ज्यादातर फेफड़ों पर हमला करता है लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता हैं। यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है। जब क्षय रोग से ग्रसित व्यक्ति खांसता, छींकता या बोलता है तो उसके साथ संक्रामक ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई उत्पन्न होता है जो कि हवा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है। ये ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई कई घंटों तक वातावरण में सक्रिय रहते हैं। जब एक स्वस्थ्य व्यक्ति हवा में घुले हुए इन माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई के संपर्क में आता है तो वह इससे संक्रमित हो सकता है।
अभियान में लगाई गई हैं 418 टीमें
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मनोज देशमणि ने बताया कि इस अभियान में 418 टीमें लगाई गयी हैं और हर टीम में आशा, आंगनवाड़ी एवं कम्युनिटी वोलेंटियर रहेंगे। प्रत्येक पांच टीमों पर एक सुपरवाइजर की तैनाती की गई है। हर ब्लॉक में एक चिकित्सा अधिकारी को इस अभियान का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस साल बीते जुलाई माह तक 9,387 टीबी रोगियों की खोज की जा चुकी है, इन सभी का उपचार स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराया जा रहा है। इस मौके पर उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. श्याम सुंदर, जिला कार्यक्रम समन्वयक आशीष दीक्षित सहित क्षय रोग विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।
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