गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद, गोरखनाथ में समर कैंप का तीसरा दिन नमाज, वुजू, गुस्ल व साफ-सफाई की अहमियत पर आधारित रहा। बच्चों को नमाज, वुजू व गुस्ल का तरीका प्रैक्टिकल के जरिए सिखाया गया। जोया फातिमा ने कुरआन-ए-पाक की तिलावत की। कासिद रजा इस्माईली ने नात-ए-पाक पेश की। कारी मुहम्मद अनस रजवी ने बच्चों से सवाल किए। सही जवाब देने वाले बच्चों को ईनाम दिया गया।
मुख्य अतिथि सुब्हानिया जामा मस्जिद तकिया कवलदह के इमाम मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने कहा कि इस्लाम धर्म में सफाई 'आधा ईमान' है। इस्लाम चौदह सौ साल से साफ-सफाई की शिक्षा देता चला आ रहा हैं। साफ-सफाई अल्लाह को पसंद है। इसका हर मुसलमान को खास ख्याल रखना चाहिए। घर, समाज व देश के साथ-साथ दिलों से भी नफरत व जलन की गंदगी दूर हो, इसके लिए समाज के हर व्यक्ति को मिलकर काम करना होगा। बच्चे देश का भविष्य हैं, इसलिए समाज व देश को साफ-सुथरा रखने में इनका अहम रोल है। समाज के हर व्यक्ति का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह अपने घर के साथ ही समाज व देश को भी स्वच्छ रखने में अपना योगदान दें।
विशिष्ट अतिथि सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि इस्लाम धर्म में साफ-सफाई की बहुत अहमियत है। इंसान खुद साफ सुथरा हो और उसके आसपास का माहौल भी सफाई वाला हो, तो यह उसके बदन और उसकी सोच को सेहतमंद बनाने में सहायक साबित होगा। कैंप में अली अहमद, आसिफ महमूद, प्रधानाचार्या आयशा खातून, उप प्रधानाचार्या शीरीन आसिफ, बेलाल अहमद, तनवीर, सैयद शम्स, आरजू, अदीबा, फरीदा, मंतशा, फरहीन, आयशा, सना, तानिया, फरहत, यासमीन, गुल अफ्शा, नाजिया आदि मौजूद रहे।
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