शहाबुद्दीन अहमद
बेतिया, बिहार।
जिला के कुछ थानों में इस तरह की घटनाएं घट जा रही है,जिससे थाना प्रभारी की क्रियाकलापों पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जा रहा है।थाना प्रभारी को घटनाओं से संबंधित कांडों का निपटारा करने के बजाय उसे तूल देना अपनी प्रतिष्ठा समझते हैं, इतना ही नहीं घूसखोरी का बाजार तो गर्म है ही,बिना पैसा लिए थानाअध्यक्ष प्राथमिकी भी दर्ज नहीं करते हैं।इस तरह की कई घटनाएं जिला में नित्यदिन घट रही हैं,इससे संबंधित कई तरह की शिकायतें संवाददाता को मिल रही है।इसी तरह की एक घटना के संबंध में संवाददाता को पता चला है कि शिकारपुर थाना अध्यक्ष ने ने ऐसा कारनामा कर गुजरा है जिससे पुलिस प्रशासन पर प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। घटना के संबंध में बताया गया है कि बारवाबरौली गांव निवासी मुश्किला खातून को दबंगों ने मारपीट कर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया,जिसका इलाज जीएमसीएच में चल रहा था,22 अक्टूबर 2025 को हुए फर्द बयान पर अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की जा सकी है,मगर उसी थाना प्रभारी नेआरोपियों के आवेदन पर पीड़िताऔर उसके परिजनों के विरुद्ध शिकारपुर पुलिस ने 24 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज कर लिया,जबकि मामले में प्राथमिकी के साथ न्याय के लिए पीड़िता के पति,शकील अहमद थाना से लेकर डीआईजी,एसपीऔर उच्च पदाधिकारी से अपना गुहार लगा चुके हैं,इस प्रकरण पर माननीय उच्च न्यायालय के अधिवक्ता,मनौअरआलम ने भी संवाददाता को बताया कि न्याय देने के बजाय,पुलिस अपराध और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है।पुलिस प्रशासन इसकी कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है।पीड़िता का प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई नहीं करनाऔर इसके उल्टेआरोपियों के द्वारा दिया गयाआवेदन पर प्राथमिकी दर्ज करना,थाना अध्यक्ष की कार्यशैली,कार्य कुशलता,घूसखोरी पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है।आखिर किस तरह की परिस्थिति में थानाअध्यक्ष ने पीड़िता केआवेदन पर प्राथमिकि दर्ज नहीं कर आरोपी केआवेदन पर प्रार्थमिकी दर्ज कर लिया,इस से यह स्पष्ट हो जाता है कि थानाअध्यक्ष ने गाढी कमाई करके इस तरह के कारनामा कोअंजाम दिया है। अगर पुलिस प्रशासन इस घटना पर पीड़िता को न्याय नहीं दिलाता है औरआरोपियों को गिरफ्तार कर जेल के सलाखों में नहीं डालता है,तो पुलिस प्रशासन न्यायालय के कटघरे में खड़ा होकर जवाब देगा।न्यायालय के द्वारा पीड़िता कोअवश्य ही न्याय मिलेगा,इसके साथ ही आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तारी काआदेश उच्च न्यायालय के द्वारा निर्गत हो सकेगा।शिकारपुर थाना अध्यक्ष को अब न्यायालय के आदेश पर पूरी कार्रवाई करके जवाब देना पड़ेगा।
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