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बकरीद की नमाजअदा करने के साथ साथ जानवर की कुर्बानी करने का पारस्परिक संबंध:-सुरैया शहाब

शहाबुद्दीन अहमद

बेतिया, बिहार।

पूरे विश्व में मुस्लिम समुदाय का महान पर्व ईदुलअजहा

10 वीं जिल्हजा को मनाया जाता है,इस वर्ष 28/29/ 30 मई को मनाया जाएगा। इस दिन पूरे विश्व के मुस्लिम समुदाय के लोग नमाजअदा करने के बाद कुर्बानी का रसमअदा करते हैं,यह दोनों रस्म एक दूसरे से पारस्परिक संबंध से जुड़े हुए हैं।ईदुलअजहा(बकरीद) इस्लाम धर्म का एक प्रमुख,पवित्र त्यौहार है।यह रिवायत

हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम,उनके बेटे हजरत ईस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानियों को याद दिलाती है।अरबी महीने के दसवीं जिलहजजा को पूरे विश्व के सारे मुसलमान ईदुलअजहा की नमाज पूरे धार्मिक उत्साह, इस्लाम धर्म के बताए हुए गतिविधियों को सामने रखते हुएअदा करते हैं,इसके बाद

जानवरों की कुर्बानी करके अपने फर्ज कोअदा करते हैं।यह पर्व पैगंबर इब्राहिम अलैहिस्सलाम काअल्लाह के रास्ते मेंअपने बेटे का कुर्बानी देने का ऐतिहासिक घटना को याद दिलाता है। इसका इस्लामी पृष्ठभूमि यह है कि अल्लाह ने इब्राहिम अलैहिस्सलाम का परीक्षा लेने के लिए ख्वाब में दिखाया था किआपअपने सबसे प्रियऔर बहुमूल्य को

कुर्बानी देने को कहा गया था 

उन्होंने इसको गंभीरता से लेते हुए सोचफिक्र में डूब गए किअल्लाह के रास्ते में सबसे प्रिय,मनपसंद,भरोसेमंद पुत्र से बड़ा कोई नहीं हो सकता, इसलिए इन्होंनेअल्लाह की रजा के लिए,उनकी हुकुम का तमिल करते हुए,अपने पुत्र,ईस्माइलअलैहिस्सलाम को कुर्बानी करने की ठान ली उन्होंनेअपने बेटे ईस्माइल अलैहिस्सलाम को इस बात की जानकारी दी किअल्लाह के रास्ते मेंअल्लाह के हुक्म के मुताबिकअपने बेटे की कुर्बानी करनी है,इस बात को सुनते ही उनके इकलौते बेटे इस्माइलअलैहिस्सलाम ने अपनी रजामंदी जाहिर कर दी,कहा कि जबअल्लाह का हुक्म है तोआप बिना सोचे समझे हमें कुर्बानी कर ही दें,ताकि अल्लाह का हुक्म पूरा हो जाए,साथ हीआपकी ख्वाब की ताबीर हो सके।

इसके बाद कुर्बानी करने के लिए सारी तैयारियां पूरी कर ली गई,कुर्बानी करने के लिए छुड़ा को तेज किया गया। इस्माइलअलैहिससलाम को कीआंख पर पट्टी बांध दी, इसके साथ ही पिता, इब्राहिमअलैहिस्सलाम ने भी अपनेआँख पर पट्टी बांधा, पट्टी इसलिए बांध लिया कि कहीं पिता और पुत्र का मोहब्बतआडे नहींआए,हाथ में छुरा लेकर हलाल करना शुरू कर दिया,अल्लाहताला को इब्राहिमअलैहिस्सलाम का यह जज्बा,कुर्बानी,त्याग अल्लाह के हुकुम का तमिल करना,आस्था पर विश्वास इतना पसंदआया कि अल्लाह ने उनके बेटे ईस्माइलअलैहिस्सलाम के बदले दुंबा रख दिया,उन्होंने दुंबा की कुर्बानी कर दी,जब आंख पर से पट्टी खोला तो दुंबा नजरआया,उस समय उन्होंने खुदा का शुक्रअदा किया,इसी को लेकरअल्लाह ने सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों पर,जो साहिबनिसाब मर्दऔरऔरत पर कुर्बानी करना वाजिब कर दिया।

इस कुर्बानी को कयामत तक 

मुस्लिम समुदायों के लिए लाजिम कर दिया।कुर्बानी करने के लिए जानवर को

स्वस्थ,एक वर्ष का होना, दाँता होना,किसी बीमारी से ग्रस्त नहीं होनाआवश्यक बताया गया है,अगर इन शर्तों में से कोई भी एक शर्त छूट जाएगा तो उस जानवर की कुर्बानी जायज नहीं होगी, कुर्बानी ही नहीं होगी। जानवर की कुर्बानी करने के बाद उसके गोश्त को तीन भागों में बांट दिया जाता है,जिसमें गरीब,नादार, पड़ोसी,मजबूर,मिस्कीन,इष्ट मित्र,सगे संबंधी में बाँट दिया

जाता है,एक हिस्सा परिवार के खाने के लिए रख लिया जाता है।कुर्बानी का यह पर्व हमें निस्वार्थ सेवा करना, त्याग,बलिदान,गरीब,मजबूर मिस्कीन,जरूरतमंद,असहाय लोगों की सहायता करना सीखाता है।यह पर्व हर वर्ष अपने निश्चित समय पर मनाया जाता है,इसी महीने में हज का रस्म भीअदा किया जाता है,पूरे विश्व से लोग हज करने के लिए मक्का और मदीना जाते हैं,वहांअनेकों प्रकार काअरकान को अदा करते हैं,कुर्बानी और हज का रस्मअदा करने के बाद अपने अपने घरों को लौट जाते हैं।

Jr. Seraj Ahmad Quraishi
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