रिपोर्ट- करुणाकर राम त्रिपाठी
महाराजगंज उत्तर प्रदेश
मानक से अधिक शुल्क लेने व मनमाने तरीके से पुस्तकों का क्रय करने हेतु अभिभावकों को बाध्य किए जाने की कतिपय शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए जनपद के जिला अधिकारी अनुनय झा ने इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम के लिए एक निर्देश जारी किया जिसके अनुसार-
01- विद्यालयों द्वारा प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों से प्रवेश शुल्क न लिया जाए। प्रवेश शुल्क केवल नवीन प्रवेश के समय ही लिया जाए।
02- जो भी शुल्क विद्यार्थियों से विद्यालय द्वारा ली जाए, उसकी शुल्क रसीद विद्यार्थी को दिया जाए। इसके अलावा शुल्क रसीद में लिए गए शुल्क के सभी मदों का अनिवार्यतः स्पष्ट उल्लेख हो।
03- मनमाने तरीके से शुल्क वृद्धि न की जाए। यदि शुल्क वृद्धि आवश्यक हो तो उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2013 की धारा-8 के अंतर्गत जिला शुल्क नियामक समिति के शुल्क वृद्धि का प्रस्ताव विचारार्थ प्रस्तुत किया जाए। जिला शुल्क नियामक समिति की अनुमन्यता के बिना शुल्क वृद्धि कदापि न की
जाए।
04- विद्यालयों में पुस्तकों का विक्रय न किया जाए तथा ना ही किसी निश्चित दुकान से पुस्तकें कय करने हेतु बाध्य किया जाए।
05- निर्धारित मूल्य (MRP) से अधिक मूल्य पर पुस्तकें न बेची जाएं।
06- पुस्तकों के मूल्य पर यदि छूट निर्धारित है, तो उसे विद्यार्थियों को अवश्य प्रदान की जाए।
नियमों / विनियमों, शासनादेशों तथा विभागीय आदेशों से किसी भी प्रकार के विचलन/अवहेलना की दशा में अर्थदण्ड, विधिक कार्यवाही या मान्यता प्रत्याहरण की कार्यवाही की जाएगी।
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