देवेन्द्र भोंडे
अमरावती, महाराष्ट्र।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और अमरावती शहर के विभिन्न संघों, पार्टियों और अन्य आम जनता की शिकायत के अनुसार, फर्जी डॉक्टर, मुंबई नर्सिंग होम अधिनियम के तहत अस्पतालों के पंजीकरण के बिना अस्पतालों का संचालन और अस्पताल के प्रतीक्षा कक्षों में मरीजों का इलाज करने वाले चिकित्सा व्यवसाय बायोमेडिकल वेस्ट के लिए अनुमति प्राप्त किए बिना सभी अस्पतालों को आवेदक के चिकित्सा शिक्षा दस्तावेज, प्रमाण पत्र, डिग्री, पंजीकरण प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।
लेकिन इस संत गाडगे बाबा अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ, औषधि विशेषज्ञ, प्रसूति रोग विशेषज्ञ समेत अन्य विशेषज्ञों की ओर से क्लीनिक व अस्पताल चलाया जा रहा था।
दिनांक 8/10/24 को एवं आज दिनांक 10/10/24 को सायं 5 बजे अस्पताल जाने पर संत गाडगे बाबा का कोई डॉक्टर एवं संचालक उपस्थित नहीं था। जिस मालिक ने जगह किराए पर ली थी वह मौजूद था और रिसेप्शन पर एक लड़की और एक स्टाफ मौजूद था और पैरामेडिकल ऑप्थल्मोलॉजी कोर्स के अतुल गौतम ने 150/- रुपये में मरीजों की जांच की और आंखों के चश्मे के नंबर और आई ड्रॉप निर्धारित किए। सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, महानगर पालिका अमरावती, मसानगंज के चिकित्सा अधिकारी आरोग्य अधिकारी डाॅ. अलमास खान, मुख्यालय के निरीक्षण अधिकारी डॉ. रूपेश खडसे और सिटी कोतवाली के पुलिस कर्मियों की संयुक्त मध्यस्थता से उक्त संस्था ने कार्यकारी डॉक्टरों के शैक्षणिक दस्तावेज भी दो दिन पहले इस संत गाडगे बाबा अस्पताल में जमा करा दिए।
साथ ही अस्पताल चलाने के लिए मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन से अनुमति प्रमाण पत्र भी नहीं लिया गया, उक्त कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, रिकॉर्ड बुक और पैरामेडिकल कोर्स स्टाफ ने डॉक्टर की जांच नहीं की और नंबर नहीं दिया। दवा और आंखों के चश्मे की भी जांच की गई।
इस अनाधिकृत अस्पताल, फर्जी डॉक्टर, अपनी डिग्री बदलकर और ऊंची डिग्री दिखाकर जनता को विशेषज्ञ होने का दिखावा करने वाले सभी डॉक्टरों के लिए एक निरीक्षण अभियान शुरू किया गया है।
इस विशेष अभियान में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विशाल काले, मुख्यालय से डॉ. रूपेश खडसे, शहरी स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी और अन्य लोगों द्वारा सामूहिक रूप से इस अस्पताल के डॉक्टरों के सभी दस्तावेजों को क्रियान्वित किया जा रहा है सामूहिक रूप से कार्यान्वित किये जाने पर संबंधित मकान के मालिक एवं संत गाडगे बाबा हॉस्पिटल के स्टाफ एवं निदेशक को स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा लिखित पत्र देकर सूचित किया गया है कि यदि जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा क्लिनिक प्रारंभ किया गया तो गंभीर कानूनी कार्रवाई की जायेगी. यदि स्वास्थ्य अधिकारी की पूर्व अनुमति नहीं मिलने पर लोगों का इलाज कर रहे ऐसे नकली और फर्जी और अनधिकृत डॉक्टरों के बारे में कोई शिकायत है, तो जनता को इसकी सूचना नगर निगम के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को देने की चुनौती दी जा रही है.
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